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नीतीश कैबिनेट का फैसला, बिहार में ठेके पर की गई भर्ती में भी लागू होगा आरक्षण

अब संविदा पर डॉक्‍टर, शिक्षक, ऑपरेटर, ड्राइवर, हाऊस कीपिंग या फिर चतुर्थवर्ग के कर्मचारियों को नियुक्‍त करने में कुल भर्तियां आरक्षण के नए नियमों से की जाएगी.

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नीतीश कैबिनेट का फैसला, बिहार में ठेके पर की गई भर्ती में भी लागू होगा आरक्षण

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. राज्‍य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया
  2. अब से होने वाली नई भर्तियों में लागू होगा आरक्षण
  3. कितना प्रतिशत आरक्षण मिलेगा अब तक यह तय नहीं
पटना: नीतीश कैबिनेट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लिया है. अब बिहार में संविदा या ठेके पर की गई भर्ती में आरक्षण लागू किया जाएगा. राज्‍य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया कि ठेके पर आउटसोर्सिंग से होने वाली भर्तियों में भी आरक्षण लागू किया जाएगा. अब तक इन नियुक्तियों में आरक्षण लागू नहीं होता था.

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इसका मतलब संविदा एवं ठेका पर जितनी भी नियुक्तियां होंगी सभी में आरक्षण लागू होगा. मतलब अब अब संविदा पर डॉक्‍टर, शिक्षक, ऑपरेटर, ड्राइवर, हाऊस कीपिंग या फिर चतुर्थवर्ग के कर्मचारियों को नियुक्‍त करने में कुल भर्तियां आरक्षण के नए नियमों से की जाएगी. 

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साथ ही एक कैबिनेट ने एक अन्य फैसले में गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज के 350वां प्रकाश पर्व के समापन समारोह के आयोजन में 52 करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी है. हालांकि अभी तक आरक्षण का प्रतिशत तय नहीं हुआ है. बिहार कैबिनेट के फैसले के बाद सरकार इसके नियम-कानून को तय करेगी. अभी स्‍पष्‍ट होना है कि आउटसोर्सिंग में रिजर्वेशन कितना प्रतिशत होगा. लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि जितना रिजर्वेशन अभी सरकारी नौकरियों में है, उतना ही बिहार सरकार लागू रखेगी. 
 
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बहरहाल बिहार कैबिनेट के इस फैसले को राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. आरक्षण को लेकर एक ओर जहां नीतीश की पार्टी के नेता ही बागी तेवर अपनाए हुए हैं तो वहीं पिछले कई दिनों से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र और राज्‍य सरकार पर हमलावर दिख रहे है. कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने इस फैसले का स्वागत किया है. ऐसे में इस फैसले का राजनीतिक असर क्या होता है यह देखने की बात होगी.


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