तीन महीने बाद घर से निकलने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आख़िर क्या-क्या किया ?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो निरंतर इस आलोचना को झेल रहे हैं कि वो 3 महीने तक अपने घर से निकले ही नहीं और सारा काम अपने सरकारी आवास के कार्यालय से ही निष्पादित किया अब अपनी छवि बदलना चाहते हैं .

तीन महीने बाद घर से निकलने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आख़िर क्या-क्या किया ?

नीतीश कुमार ने पटना शहर में घूम-घूम कर विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की

पटना:

कोरोना संकट काल के दौरान देश में कई मुख्यमंत्रियों ने अपनी नई पहचान बनायी तो कई मुख्यमंत्रियों ने अपनी अच्छे प्रशासक की पहचान खोयी भी है .बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो निरंतर इस आलोचना को झेल रहे हैं कि वो 3 महीने तक अपने घर से निकले ही नहीं और सारा काम अपने सरकारी आवास के कार्यालय से ही निष्पादित किया अब अपनी छवि बदलना चाहते हैं .

इसी दिशा में जहां एक ओर बृहस्पतिवार को शहीदजवानों को श्रद्धांजलि देने पटना एयरपोर्ट पर पहुंचे. वहीं शुक्रवार को पटना शहर में घूम-घूम कर विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की .नीतीश कुमार का क़ाफ़िला शुक्रवार को सबसे पहले पटना के कंकड़बाग स्थित इनडोर स्टेडियम पहुंचा जहां पाटलिपुत्र खेल परिसर में कोरेना के  पीड़ित लोगों के लिए बने 100 बेड के उपचार केन्द्र का निरीक्षण किया और वहां उन्हें दवाओं के साथ साथ ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था को सुनिश्चित करने का आदेश दिया.

इसके बाद पटना शहर  में और बिहार के अन्य भागों में पिछले घंटे से निरंतर बारिश की स्थिति के मद्देनज़र नीतीश कुमार ने जल जमाव की फ़्री में उसकी निकासी की व्यवस्था का ख़ुद से निरीक्षण किया वो सबसे पहले योगी पूर्व प्रेमिका पम्पिंग प्लांट पहुंचे और वहां पर उन्होंने जहां-जहां भी ड्रेनेज प्लांट है वहां पर बिजली के ट्रांसफॉर्मर ऊंचाई पर लगाने का आदेश दिया .लेकिन इस दौरान उन्होने नगर विकास विभाग के अधिकारियों को एक बात साफ़ कर दी कि इस बार जल जमाव यह सब पिछले वर्ष हुआ था वैसी स्थिति न हो उसके लिए हर संभव उपाय किए जा चुके नीतीश कुमार को मालूम है कि अगर इस वर्ष पटना साहिब में वैसी ही जल जमाव की स्थिति रही तो न केवल उनकी सरकार बल्कि व्यक्तिगत रूप से उनकी भी काफ़ी फ़ज़ीहत होगी क्योंकि पूरे देश में ऐसे भी एक कुशल प्रशासक के रूप में जो उनकी सुशासन बाबू की छवि बनी थी हाल के दिनों में उस पर सब लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं.


उसके बाद नीतीश कुमार ने सिंचाई विभाग के ज़मींदारी बांध का निरीक्षण किया और साफ़ कहा कि इस नाले के पानी को ट्रीट कर पुनपुन नदी में गिराया गया और साथ ही साथ इसके किनारे किनारे पक्की बाउंड्री भी बढ़ाई जाए. और अंत में वो अंतर्राज्यीय बस अड्डे के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे .निश्चित रूप से इस बस अड्डे के निर्माण कार्य काफ़ी शिथिल गति से चल रहा है और नीतीश कुमार ने अपने अंदाज़ में अब इसके निर्माण को जल्द से जल्द पूरा करने का आदेश दिया लेकिन वो चाहे बृहस्पतिवार का कार्यक्रम हो या शुक्रवार का सभी जगह मीडिया को दूर रखा गया.

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साथ ही साथ जल निकासी के कार्यक्रम के समीक्षा के दौरान राज्य के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा भी नदारद दिखे उनके कार्यालय के द्वारा बताया गया कि मंत्री जी को मुख्यमंत्री के निरीक्षण के कार्यक्रम के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई थीं. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार को इस बात का अंदाज़ा हो गया है कि घर में बैठकर जो समीक्षा बैठकें वो कर रहे थे उसके कारण विपक्ष लगातार उनके ऊपर आक्रामक हो रहा था और जनता के बीच भी उनकी एक छवि बनती जा रही थी कि वो सब कुछ अपने सरकारी आवास से कार्यालय से कर लोगों के बीच नहीं जाना चाहते हैं. नीतीश कुमार के समर्थक भी मानते हैं कि इन आलोचनाओं से चोटों पर कोई असर हो या न हो लेकिन हां पूरे देश में उनकी छवि पर प्रतिकूल असर ज़रूर पड़ा है.