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बिहार के चनका गांव का केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना श्यामा प्रसाद मुखर्जी में हुआ चयन

मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल और स्थानीय उद्यमिता तथा आर्थिक गतिविधियों को शुरू किया जाता है.

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बिहार के चनका गांव का केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना श्यामा प्रसाद मुखर्जी में हुआ चयन

इस योजना में शामिल होने पर चनका में मूलभूत सुविधाओं का विकास होगा...

खास बातें

  1. गांव श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन' में हुआ है.
  2. इस मिशन के तहत स्मार्ट गांवों का समूह विकसित किया जा रहा है.
  3. कहा, छह महीने के अंदर इन क्षेत्रों का विकास दिखाई देने लगेगा.
पूर्णिया:

बिहार के पूर्णिया जिले का गांव चनका का चयन केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन' में हुआ है. इस चयन को लेकर चनका सुर्खियों में है. वैसे तो, इस मिशन के तहत पूर्णिया जिले की चार पंचायतों का चयन किया गया है, परंतु चनका को लेकर लोगों में उत्साह ज्यादा है. इस मिशन में शामिल होने के बाद चनका गांव के लोगों को अब अपने गांव में ही शहरी सुविधाएं मिलने की आस जग गई है. इस मिशन में चयनित होने से पहले भी चनका गांव कुछ अलग काम के कारण सुर्खियां बटोर चुका है. इस गांव में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'चनका रेसीडेंसी' की शुरुआत हुई थी, जिसमें देश-विदेश के लोग शामिल होते हैं. चनका रेसीडेंसी में अब तक इयान वुलफोर्ड, डेविड कूडसमा, फ्रांसिस लिंडसे और एलिसन जैसी हस्तिायां तथा देश के नामी-गिरामी पत्रकार, समाजसेवी यहां पहुंच चुके हैं. 

इस रेसीडेंसी की शुरुआत करने वाले ग्रामीण गिरीन्द्र नाथ झा ने जानकारी देते हुए कहा कि 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन' के तहत चनका का चयन हमारे लिए बड़ी बात है. 


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उन्होंने कहा, 'कला, साहित्य, पत्रकारिता जगत से जुड़े देश-विदेश के लोग चनका आते हैं. इस योजना में शामिल होने पर चनका में मूलभूत सुविधाओं का विकास होगा.' गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा रूर्बन मिशन को 16 सितंबर, 2015 को ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे के विकास को लागू किया गया था. योजना के तहत शहरों के पास के सभी गांवों को समूह (क्लस्टर) में वर्गीकृत किया गया है. प्रत्येक क्लस्टर को हर साल 10 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी जिससे गांवों की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा.

रुर्बन मिशन देशभर में 5,142.08 करोड़ रुपए की लागत से चलाया जा रहा है. इस योजना के तहत प्रत्येक गांव को शहरों वाली सुविधाएं मुहैया कराई जाती है. साथ ही बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र आदि की सुविधा ग्रामीणों को दी जाती है. इसके अलावा चयनित गांव में कौशल विकास की व्यवस्था की जाती है. इस योजना की सबसे प्रमुख बात यह है कि गांवों को क्लस्टर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. एक क्लस्टर की आबादी 25 से 50 हजार तक रखी जाती है. केंद्र सरकार गैप फंडिंग पर कुल खर्च का 30 फीसदी अपने बजट से देय करेगी. इस मिशन के तहत स्मार्ट गांवों का समूह विकसित किया जा रहा है.  मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल और स्थानीय उद्यमिता तथा आर्थिक गतिविधियों को शुरू किया जाता है.

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पूर्णिया के उपविकास आयुक्त राम शंकर सिंह ने कहा कि इस मिशन को लेकर पहली बैठक हो चुकी है. उन्होंने बताया कि छह महीने के अंदर इन क्षेत्रों का विकास दिखाई देने लगेगा. उनका मानना है कि इस मिशन के तहत गांवों में शहर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सवच्छता और पेयजल में प्राथमिकता दी जाती है. पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक निशांत कुमार तिवारी की पहल पर चनका में 'मेरी पाठशाला' चलती है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को पुलिस कर्मियों द्वारा शिक्षा दी जाती है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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