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बिहार के लिए विशेष दर्जे की मांग को लेकर नीतीश कुमार का रुख हुआ नरम?

नीतीश कुमार से जब यह पूछा गया कि क्या बिहार के विशेष राज्य के मुद्दे को उन्हें छोड़ दिया है तब उनका कहना था कि यह मांग जारी है लेकिन फ़िलहाल केंद्र ने विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म कर दिया है.

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बिहार के लिए विशेष दर्जे की मांग को लेकर नीतीश कुमार का रुख हुआ नरम?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

पटना:

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्तमान में चल रहे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के मॉडल का एक बार फिर विरोध किया है. नीतीश कुमार के अनुसार इसके जगह देश में या केंद्र की योजना हों जहां सारा भार केंद्र उठाए और एक राज्यों की योजना हो जिसका आर्थिक भार वो अपने ख़ज़ाने से उठाएं. नीतीश कुमार ने सोमवार को अपने लोक संवाद के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि नीति आयोग के अगली बैठक में वो अपनी इस मांग को दोहराएंगे कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं को राज्य पर थोपा न जाए. क्योंकि राज्यों को हर वर्ष केंद्र की अलग-अलग स्कीम के लिए मैचिंग ग्रांट के नाम पर काफ़ी आर्थिक भार उठाना पड़ता है. नीतीश कुमार ने कहा कि इसका एक ही समाधान है कि पूरे देश में एक केंद्र की स्कीम हो और एक राज्य की. केंद्र की स्कीम का सारा भार केंद्र सरकार उठाए और राज्य की स्कीम का राज्यों के ऊपर छोड़ देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पंद्रहवें वित्त आयोग के सामने उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है और उम्मीद है उनकी इस मांग पर कोई फ़ैसला लिया जाएगा. 

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नीतीश कुमार से जब यह पूछा गया कि क्या बिहार के विशेष राज्य  के मुद्दे को उन्हें छोड़ दिया है तब उनका कहना था कि यह मांग जारी है लेकिन फ़िलहाल केंद्र ने विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म कर दिया है. लेकिन केंद्र सरकार पर उन्हें पक्का भरोसा और विश्वास है कि बिहार के विकास से संबंधित मुद्दों को वो गंभीरता से लेगी. इससे पूर्व केंद्र में नरेंद्र मोदी की दोबारा सरकार बनने से पहले NDA की एक बैठक में नीतीश कुमार ने अपने भाषण में अपील की थी कि सरकार बनने के बाद जो भी पिछड़े राज्य हैं उन्हें विकसित राज्यों के स्तर पर लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा.

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