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बिहार में बाढ़ से अब तक 514 मरे, नीतीश ने की समीक्षा बैठक

पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ की चपेट में आने से 32 लोगों की मौत हो गई, जिससे बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 514 तक पहुंच गई है.

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बिहार में बाढ़ से अब तक 514 मरे, नीतीश ने की समीक्षा बैठक

बिहार में बाढ़ की स्थिति खराब है (फाइल फोटो)

पटना: बिहार के कई जिलों में अभी भी बाढ़ का पानी बह रहा है. बिहार में बाढ़ से 1.71 करोड़ से ज्यादा की आबादी अभी भी प्रभावित है, जबकि बाढ़ की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है. पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ की चपेट में आने से 32 लोगों की मौत हो गई, जिससे बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 514 तक पहुंच गई है. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और कई आवश्यक निर्देश दिए. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "बाढ़ग्रस्त जिलों के प्रभावित इलाकों से अब बाढ़ का पानी उतर रहा है, लेकिन अभी भी राज्य के 19 जिलों के 187 प्रखंडों की 1.71 करोड़ से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है. बाढ़ की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है." 

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सोमवार को जारी आंकड़े के मुताबिक, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ से 32 लोगों की मौत हुई है, जिस कारण बाढ़ से मरने वालों की संख्या 514 तक पहुंच गई है. 

अररिया में सबसे ज्यादा 95 लोगों की मौत हुई है, जबकि किशनगंज में 24, पूर्णिया में 44, कटिहार में 40, पूर्वी चंपारण में 32, पश्चिमी चंपारण में 42, दरभंगा में 37, मधुबनी में 28, सीतामढ़ी में 47, शिवहर में छह, सुपौल में 16, मधेपुरा में 29, गोपालगंज में 20, सहरसा में आठ, खगड़िया में 10, मुजफ्फरपुर में 21, समस्तीपुर में दो तथा सारण में 13 लोगों की मौत हुई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को सभी जिलों के जिला अधिकारियों एवं जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बाढ़ राहत कार्यो की समीक्षा बैठक की तथा अधिकारियों को कई निर्देश भी दिए. 

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मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा, "इस बार की बाढ़ अभूतपूर्व थी. मैंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया. अधिकारियों को भी निर्देश देकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कराया गया, ताकि वे स्थिति का सही आकलन कर सकें." 

बाढ़ राहत कार्य में लगे सभी लोगों के कार्यो की सराहना करते हुए नीतीश ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द नकद अनुदान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा, "मुझे प्रसन्नता होगी, अगर बकरीद पर्व से पूर्व बाढ़ प्रभावित परिवारों को निर्धारित मापदंड के अनुसार नगद अनुदान की राशि उपलब्ध करा दी जाए. इसके लिए यथासंभव प्रयास करने चाहिए." 

उन्होंने कहा कि जिन बाढ़ पीड़ितों का बैंक में खाता नहीं है, उनका जल्द से जल्द बैंक खाता खुलवाया जाए, जिससे उनकी राशि खातों में हस्तांतरित की जा सके. मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बताया था कि सड़कों से जलनिकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए. हमारी नेपाल के प्रधानमंत्री से भी बाढ़ के मुद्दे पर बातचीत हुई है." 

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आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "राज्य बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में अब लोगों के शिविरों से घर लौटने के कारण राहत शिविरों की संख्या कम की जा रही है. कई जिलों में चलाए जा रहे राहत शिविरों को बंद कर दिया गया है. फिलहाल 115 राहत शिविर चल रहे हैं, जिसमें करीब एक लाख से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं. इन क्षेत्रों में अभी भी 794 सामुदायिक रसोई चल रही है."


आपदा प्रबंधन विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त जिलों में राहत और पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है. बाढ़ प्रभावित जिलों में लगातार सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ ) की टीम राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है. (आईएएनएस की रिपोर्ट)
 


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