सस्ती बिजली के लिए बिहार सरकार अपने पावर प्लांट एनटीपीसी को देने पर सहमत

राज्य सरकार का वादा, अगले साल के अंत तक प्रदेश के हर घर तक बिजली पहुंचा दी जाएगी, ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक हुई

सस्ती बिजली के लिए बिहार सरकार अपने पावर प्लांट एनटीपीसी को देने पर सहमत

प्रतीकात्मक फोटो

पटना:

बिहार सरकार  राज्य में बिजली उपभोक्ता को सस्ती बिजली देने के लिए अब अपने पावर प्लांट केंद्र सरकार की एनटीपीसी को देना चाहती है. राज्य के ऊर्जा विभाग की बैठक शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में हुई. इस समीक्षा बैठक में पावर जनरेशन कंपनी के जनरल एसेट,  यानी कांटी और बरौनी थर्मल पावर को पूरी तरह से एनटीपीसी  के जिम्मे देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई. हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस आधार पर कि राज्य के लोगों को सस्ती दर पर बिजली मिलेगी और राज्य के ऊर्जा विभाग का क़र्ज़ भी करीब-करीब माफ़ हो जाएगा, अपनी सहमति दे दी है.  

हालांकि एनटीपीसी की बिहार सरकार के इस विचार पर क्या प्रतिक्रिया है, ये पता नहीं चल पाया है. लेकिन राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ये एक बड़ी खबर है. राज्य सरकार  का मानना है कि बैंकों से केंद्र सरकार के प्रतिष्ठान होने के कारण और अच्छी रेटिंग के कारण राज्य  सरकार की तुलना में सस्ता कर्ज मिलने से बिजली के उत्पादन के बाद उसकी कीमत राज्य सरकार की तुलना में कहीं कम होगी. इसके आलावा राज्य सरकार के ऊपर पावर प्लांट को चलाने का जिम्मा और अन्य जिम्मेदारी जैसे कोल लिंकेज जैसी समस्या नहीं रहेगी. फिलहाल बिहार में कहलगांव, बाढ़ में एनटीपीसी  के प्लांट हैं और इसके अलावा कांटी और नबीनगर राज्य सरकार और एनटीपीसी का संयुक्त उपक्रम है.  

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हर घर बिजली नीतीश  कुमार का मुख्य चुनावी नारा रहा है. हालांकि बिहार सरकार इस साल के अंत में हर गांव में बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है और यह भी वादा है कि अगले साल के अंत तक राज्य के हर घर तक बिजली पहुंचा दी जाएगी. लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि सोलर ऊर्जा के उत्पादन से सम्बंधित सभी काम वह अपने पास रखेगी. फिलहाल राज्य सरकार लखीसराय जिले के कजरा और भागलपुर  जिले के पीरपैंती में सोलर पावर प्लांट लगा रही है. यह काम भी इसने एनटीपीसी को दिया है.  

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राज्य के ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य में एक पार्टी की सरकार होने के कारण उसके इस नए प्रस्ताव पर एनटीपीसी  द्वारा ज्यादा विरोध नहीं किया जाएगा. राज्य में फिलहाल करीब 4500  मेगावाट ऊर्जा की खपत होती है. इसमें से अधिकांश केंद्रीय एजेंसियों से खरीद कर पूर्ति की जाती है. हाल में बिहार में पूरे देश के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मलेन होना था जिसको रद किए जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी.