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नियोजित शिक्षकों के हक में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी बिहार सरकार

बिहार के लगभग 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों के मंसूबे पर उस समय पानी फिर गया, जब पटना हाईकोर्ट के शिक्षकों के हक में आए ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जाने का मन बनाया.

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नियोजित शिक्षकों के हक में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी बिहार सरकार

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. नियोजित शिक्षकों के हक में HC के फैसले के खिलाफ अपील करेगी बिहार सरकार
  2. पटना हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को सही ठहराया है
  3. शिक्षकों का वेतन विद्यालय में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों से कम है
पटना:

बिहार के लगभग 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों के मंसूबे पर उस समय पानी फिर गया, जब पटना हाईकोर्ट के शिक्षकों के हक में आए ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जाने का मन बनाया. मंगलवार को पटना हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को सही ठहराया है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और और जस्टिस डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले में कहा कि नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के समान वेतन नहीं देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है और सरकार को इसे लागू करना चाहिए. बताया जाता है कि सुनवाई के दौरान नियोजित शिक्षकों को मिल रहा वेतन पर शिक्षकों के पक्ष के वरीय अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि नियोजित शिक्षकों का वेतन विद्यालय में कार्यरत चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों से भी कम है, जिसके बाद आदालत ने सरकार को फटकार भी लगाई थी.

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अब बिहार सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करने का मन बना रही है. नियोजित शिक्षकों पर आये पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने उस पर विचार करने की बात कही है. राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा है कि बिहार सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील भी कर सकती है. हालांकि हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि हमें अभी फैसले की प्रति नहीं मिली है, कोर्ट के इस फैसले को संपूर्ण अध्ययन करने के बाद ही सरकार कोई निर्णय लेगी , साथ ही उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है. 

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बता दें कि सर्वप्रथम मुंगेर के बनहरा स्कूल के शिक्षक उपेंद्र राय ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.  इसके बाद बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने 2009 में ही शिक्षकों के शोषणमूलक एवं शिक्षा विरोधी सरकारी नीतियों के खिलाफ याचिका दायर की थी. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन जज जीएस खेहर एवं एसए बाब्डे ने इसी संदर्भ के ऐतिहासिक फैसले से शिक्षकों के हौसले की आफजाई की थी और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सभी उच्च न्यायालय एवं सरकार के लिए उक्त फैसले के ही अनुरूप कार्यान्वयन की बाध्यता का उल्लेख किया था. 

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इधर, शिक्षा मंत्री के बयान पर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. संघ के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि ऐसा करना हाईकोर्ट एवं संवैधानिक प्रतिबद्धता का उल्लंघन होगा एवं शिक्षा, शिक्षक तथा शिक्षार्थियों के लिए भी घातक होगा तथा सरकार की छवि भी कलंकित होगी. हालांकि, समान काम के लिए समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी नीतियों पर विचार करने का सुझाव दिया था.  बहरहाल, राज्य के लगभग 3.5 लाख नियोजित शिक्षक समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर पिछले कई सालों से आंदोलनरत थे और शिक्षकों ने कई बार हड़ताल का रास्ता भी अपनाया था. 

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अदालत के इस फैसले के बाद सूबे के विधायलयों में कार्यरत शिक्षिकों में खुशी की लहर देखी जा रही थी, मगर एक बार फिर यह मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है.   



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