कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर, ट्रे में मासूम, अस्पताल में गमले...ये केंद्रीय मंत्री का इलाका है

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे के संसदीय क्षेत्र स्थित सदर अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है. जहां ट्रे में नवजात और कांधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर लिए एक दंपत्ति दर-दर भटकते दिख रहे हैं, वहीं सदर अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से नवजात की मौत हो गई.

कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर, ट्रे में मासूम, अस्पताल में गमले...ये केंद्रीय मंत्री का इलाका है

भटकते मां-बाप, ये मोदी के मंत्री अश्विनी चौबे का इलाका है

पटना:

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे (ashwini kumar chaubey) के संसदीय क्षेत्र स्थित सदर अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है. इस तस्वीर में एक मां अपनी नवजात बच्ची को ट्रे में रखकर वहीं पिता कांधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर इलाज के लिए हॉस्पिटल की चक्कर लगाते हुए दिख रहे हैं. सिर्फ इतना ही नहीं सदर अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से नवजात की मौत हो गई. यह फोटो बेहद दर्दनाक होने के साथ- साथ बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को तार- तार करती हुई नजर आ रही है. दंपत्ति की फोटो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. आप फोटो में देख सकते हैं कि किस तरह से  सदर हॉस्पिटल के अंदर माता- पिता अपनी नवजात बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए भागते हुए नजर आ रहे हैं. फोटो में साफ दिख रहा है कि पिता कंधे पर ऑक्सीजन का सिलेंडर लिये हुए है और मां बच्ची की जिंदगी बचाने कि लिए हाथ में ट्रे लिये हुए है. केंद्रीय स्वास्थ राज्य मंत्री के संसदीय क्षेत्र के हॉस्पिटल की ऐसी स्थिती शायद ही पहले किसी ने देखी होगी. 

आपको बता दें कि यह तस्वीर बक्सर सदर अस्पताल में 23 जुलाई को ली गई थी जो सोशल मीडिया के जरिए बहुत तेजी से वायरल हो रही हैं.  तस्वीर में एक महिला ट्रे में अपने नवजात को ले रखा है और कांधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर लिए एक व्यक्ति महिला के साथ हॉस्पिटल के अंदर चलता हुआ दिख रहा है. कांधे पर ये सिलेंडर कोई मामूली सिलेंडर नहीं, बल्कि बक्सर की स्वास्थ्य व्यवस्था की है, जहां कागजी कार्रवाई पूरी होते-होते एक नवजात की जान चली गई. पीड़ित व्यक्ति ने फोन पर निजी अस्पताल से लेकर सरकारी अस्पताल के बद इंतजामी की सारी कहानी सुनाई. वहीं, आनन-फानन में सिविल सर्जन ने डीएस को जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को पूरे मामले की जांच की जिम्मेवारी दे दी.

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बता दें कि राजपुर के सखुआना गांव के निवासी सुमन कुमार अपनी पत्नी को डिलीवरी के लिए बक्सर सदर अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने डिलीवरी कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद वो अपनी पत्नी को लेकर निजी अस्पताल में चला गया. वहां डिलीवरी तो हुई, लेकिन शिशु को सांस लेने में तकलीफ होने पर कर्मियों ने पिता के कंधे पर ऑक्सीजन का सिलेंडर और प्रसूता को ट्रे में नवजात को देकर सदर अस्पताल का रास्ता दिखा दिया.

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18 किमी की दूरी तय कर लाचार दंपत्ति सदर अस्पताल पहुंचे, जहां कागजी करवाई पूरा करते करते डेढ़ घंटे लग गए और इसी दौरान नवजात ने दम तोड़ दिया. अस्पताल प्रशासन की बेशर्मी यहीं नहीं रूकी, शव के साथ दपंत्ति को घर भेजने के लिए अस्पातल प्रशासन के तरफ से किसी भी तरह के खास इंतजाम नहीं किये गए. इस दौरान सदर अस्पताल में ही मौजूद दूसरे व्यक्ति ने इस घटना की दो तस्वीर खींचकर मीडिया को दे दिया, जिसके बाद ये मामला उजागर हो सका है. बहरहाल इस घटना के बाद जिलाधिकारी ने पूरे मामले में जांच के आदेश दे दिया है.