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बिहार : जेल में बंद लुटेरे ने देश की सबसे बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दिया!

हाजीपुर में दिनदहाड़े देश की अब तक की सबसे बड़ी लूट की वारदात की, पुलिस के रिकार्ड में जेल में बंद था लुटेरों का सरगना

बिहार : जेल में बंद लुटेरे ने देश की सबसे बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दिया!

हाजीपुर में मुथूट फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में लुटेरों ने 55 किलोग्राम सोना लूट लिया था.

खास बातें

  • हाजीपुर में 23 नवंबर को दोपहर में 12 बजे हुई थी वारदात
  • लुटेरे मुथूट फाइनेंस से 55 किलोग्राम सोना लूटकर फरार
  • सीसीटीवी में जेल में बंद लुटेरा दिखा तो पुलिस के होश उड़ गए
पटना:

जेल में बंद अपराधियों द्वारा लूट, हत्या और अपराध की किसी वारदात की साजिश रचने के किस्से तो आपने कई बार सुने होंगे, लेकिन क्या आपने किसी ऐसी वारदात के बारे में सुना है जिसको जेल में बंद किसी अपराधी ने खुद अंजाम दिया हो. वारदात का एक ऐसा खुलासा जिसको सुनकर आप न केवल हैरान रह जाएंगे, बल्कि पुलिसिया व्यवस्था पर आपका भरोसा उठ जाएगा. यह दिनदहाड़े देश की अब तक की सबसे बड़ी लूट की वारदात है.

बिहार के हाजीपुर में अब तक की देश की सबसे बड़ी लूट के मामले में जो खुलासा हुआ है वह बिहार पुलिस की उस लचर व्यवस्था की हकीकत को उजागर करने वाला है जिसकी वजह बिहार की सुशासन वाली छवि टूटती दिख रही है.

हाजीपुर में 23 नवंबर 2019 को दोपहर 12 बजे सबसे व्यस्त बाजार सिनेमा रोड के जगदम्बा स्टेट अपार्टमेंट में गोल्ड लोन कंपनी मुथूट फाइनेंस के आफिस में ग्राहक की शक्ल में एक लड़का पहुंचा. आफिस का दरवाजा खोलने से पहले सिक्युरिटी में तैनात गार्ड ने लड़के की पूरी तलाशी ली. जांच के बाद गार्ड ने लड़के को अंदर जाने की इजाजत दी. आफिस के अंदर मौजूद गार्ड ने गेट खोला लेकिन लुटेरा आफिस में दाखिल होने के बजाय गेट पर इस तरह खड़ा हो गया कि गार्ड गेट बंद नहीं कर सके.  तभी धड़ाधड़ छह लुटेरे दौड़ते हुए पहुंचे. उन्होंने गार्ड को पकड़ लिया और फाइनेंस आफिस के अंदर दाखिल हो गए. सभी के हाथों में पिस्तौलें थीं. आफिस में मौजूद एक अन्य गार्ड, कंपनी के कर्मचारियों और ग्राहकों को पिस्तौल की नोक पर लेने के बाद बेखौफ लुटेरों ने गोल्ड फर्म के स्ट्रॉन्ग रूम से सोने के पैकेट निकाले और बैगों में भरे. महज 20 मिनट के अंदर लुटेरे 55 किलो सोना लेकर निकल भागे.

बिहार के हाजीपुर में सनसनीखेज वारदात, डकैतों ने दिनदहाड़े 55 किलोग्राम सोना लूटा

मुथूट फाइनेंस के आफिस से सोना लेकर भागने के लिए भी लुटेरों ने शातिराना तरीका अपनाया. वे लूट के बाद एक साथ नहीं भागे बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में एक-एक कर निकले, ताकि भीड़भाड़ वाले इस बाजार में किसी को लूट जैसी किसी बात का शक न हो. एक लुटेरा सर पर बोरे में लूट का सोना लेकर इस तरह निकलता दिखा मानो कोई आम आदमी हो. लूट की वारदात को बैंक के अंदर पहुंचे सात लुटेरों ने अंजाम दिया तो बाहर लुटेरों के कई साथी सीसीटीवी कैमरों की जद में आए. यह लुटेरों के साथियों की बैकअप टीम थी. लूट की इस वारदात को करीब 15 से 20 अपराधियों ने अंजाम दिया था.

दिनदहाड़े लूट की इस वारदात ने पूरे बिहार पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया था. आनन फानन में लूट की इस वारदात की जांच के लिए अब तक की सबसे बड़ी एसआईटी टीम बनाई गई. बिहार पुलिस के बड़े अधिकारियों की टीम हाजीपुर में कैम्प कर वारदात की जड़ों को तलाशने में जुट गई.  

जांच शुरू हुई लेकिन बजाए लुटेरों का खुलासा होने के पुलिस की ही कलई खुलनी शुरू हो गई. पुलिस की जांच ने ही पुलिस की नाकामियों को उजागर करना शुरू कर दिया. खुलासा हुआ कि पुलिस की लापरवाही ने ही इस बड़ी लूट को अंजाम तक पहुंचने का रास्ता बनाया था.

इस वारदात में किसी भी लुटेरे ने अपना चेहरा छुपाने की कोशिश नहीं की थी. सीसीटीवी में लुटेरों के साफ़ साफ़ चेहरे दिख रहे थे. सो पुलिस को लुटेरों की पहचान करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. अगले ही दिन पुलिस ने 6 लुटेरों का पोस्टर जारी कर दिया. सीसीटीवी की तस्वीरों से पता चला कि बैंक के अंदर जिस लुटेरे ने लूट को लीड किया था वह वैशाली जिले का ही दुर्दांत मुकुल राय उर्फ़ प्रियरंजन है. लूट के दौरान मिली तस्वीरों से सात लुटेरों में से जिन तीन लुटेरों की पहचान कर ली गई थी, उसमें टीम लीडर मुकुल के अलावा, सोना लूट के मामले में पहले से फरार वैशाली जिले का ही वीरेंदर शर्मा और समस्तीपुर का कुख्यात विकाश झा निकला. वीरेंदर और विकास झा फरवरी 2019 में मुजफ्फरपुर में 32 किलो सोने की लूट के मामले में शामिल थे और पुलिस की पकड़ से बाहर थे. महज 17 साल का नाबालिग मुकुल उर्फ़ प्रियरंजन इलाके में दर्जनों आपराधिक मामलों की वजह से कुख्यात था.  

पुलिस ने लुटेरों पर इनाम का ऐलान कर दिया. लेकिन पुलिस ने जैसे ही जांच आगे बढ़ाई, एक ऐसा खुलासा हुआ जिस पर खुद पुलिस को यकीन कर पाना मुश्किल था. जिस मुकुल राय उर्फ़ प्रियरंजन को लूट का टीम लीडर बताकर पुलिस ने पोस्टर जारी किया था वह जेल के अंदर था. जिस लुटेरे को पुलिस ढूंढ रही थी, पूरा पुलिस महकमा दिन-रात एक किए था वह तीन महीने से मुजफ्फरपुर के रिमांड होम में बंद था.

रिमांड होम में बंद इस शातिर लुटेरे की लूट के दौरान की तस्वीर सामने आने के बाद पुलिस भागी भागी मुजफ्फरपुर पहुंची लेकिन यहां पुलिस के हाथ जो जानकारी लगी उससे बिहार पुलिस के होश उड़ गए. पता चला कि लूट के ठीक 17 दिन पहले शातिर मुकुल को उसके साथी छुड़ा ले गए थे. खुलासा हुआ कि  6 नवंबर को ही अपराध के एक मामले में पेशी के लिए  पुलिस मुकुल को हाजीपुर कोर्ट लेकर पहुंची थी. हाजीपुर से मुजफ्फरपुर लौटने के दौरान मुकुल के चार लुटेरे साथी बीच सड़क पर पुलिस की गाड़ी रोककर पिस्टल की नोक पर मुकुल को छुड़ा ले गए थे. पुलिस के सामने बड़ा सवाल यह था कि आखिर कैसे फरार होने के बावजूद किसी को भी मुकुल के फरार होने की जानकारी नहीं थी. क्यों इतने दुर्दांत अपराधी के फरार हो जाने के बाद भी कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई थी. जिस लुटेरे की तस्वीर का पोस्टर बनवाकर बिहार पुलिस लोगों को इनाम देने की घोषणा कर रही थी, वह लूट के दौरान पुलिस की फाइलों में सलाखों के पीछे था.

दरअसल लूट की इस बड़ी वारदात की प्लानिंग के तहत मुकुल के साथियों ने लूट के करीब 15 दिन पहले मुकुल को पुलिस के चंगुल से निकालने की प्लानिंग की. यह प्लान सफल रहा. रिमांड होम के चार जवान जो मुकुल को पेशी से लेकर मुजफ्फरपुर रिमांड होम लौट रहे थे, कैदी मुकुल के फरार होने के बाद चुपचाप मुजफ्फरपुर लौट गए. मुजफ्फरपुर रिमांड होम के सुप्रिंटेंडेंट ने मुकुल के फरार होने को लेकर वैशाली पुलिस को एक चिट्ठी लिख डाक में डाल दी. डाक जब तक वैशाली पुलिस को मिलती और मुकुल की फरारी की जानकारी मिलती तब तक मुकुल और उसके साथियों ने इस लूट की वारदात को अंजाम दे दिया था.

इस खुलासे के बाद सकते में आई बिहार पुलिस ने लूट के इस मास्टरमाइंड के फरार होने के 20 दिनों बाद और लूट की वारदात को अंजाम देने के 3 दिन बाद उसके फरार होने की एफआईआर दर्ज कराई.

इस लूट कांड ने बिहार पुलिस की पूरी कलई खोल दी. दूसरे लुटेरे वीरेंदर शर्मा का पोस्टर पुलिस ने जारी किया था. वह पहले से मुजफ्फरपुर में हुए सोना लूट मामले में आरोपी है और पुलिस शायद उसकी खोज खबर लेना भूल गई थी. दूसरी वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस को उसकी पहली वारदात की याद आई और मुजफ्फरपुर पुलिस लुटेरे वीरेंदर शर्मा के घर 9 महीने पहले के लूट मामले का इश्तेहार लेकर पहुंची. यानी पुलिस लुटेरों से महीनों पीछे थी और लुटेरे एक के बाद एक लूट की वारदातें करके पुलिस को खुली चुनौती देते दिख रहे हैं.

इसी मामले में एक अन्य लुटेरे की पहचान किशलय के तौर पर हुई, जिसने इस लूट से ठीक नौ महीने पहले मुजफ्फरपुर में 32 किलो सोना लूट था. आरोपी किशलय मुजफ्फरपुर भगवानपुर के अपने मकान जमीन को बेचकर अपने परिवार के साथ भाग निकला.

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