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दलितों ने रामविलास पासवान और सुशील मोदी को काले झंडे क्यों दिखाए?

मोकामा में चौहरमल जयंती के दौरान केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को दलितों की नाराजगी का सामना करना पड़ा

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दलितों ने रामविलास पासवान और सुशील मोदी को काले झंडे क्यों दिखाए?

मोकामा में चौहरमल जयंती समारोह में रामविलास पासवान और सुशील मोदी को काले झंडे दिखाए गए.

खास बातें

  1. समारोह में नेताओं के पहुंचते ही काले झंडे लहराने लगे
  2. पासवान ने कहा कि आरक्षण पर कोई उंगली नहीं उठा सकता
  3. सुशील मोदी ने पासवान की जयकार की, जल्द खत्म किया भाषण
पटना:
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बिहार में हर वर्ष दलित समुदाय द्वारा मोकामा में चौहरमल जयंती धूमधाम से मनाई जाती है. लेकिन शनिवार को जब इस समारोह में भाग लेने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी पहुंचे तो काले झंडों से उनका स्वागत किया गया.

समारोह में बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोग जमा थे. जैसे ही पासवान और मोदी पहुंचे उन्होंने काले झंडे दिखाना शुरू कर दिया. आयोजकों की तमाम अपीलों के बावजूद वे शांत नहीं हुए. तब रामविलास पासवान ने माइक लिया और कहा कि जब तक वे जिंदा हैं कोई आरक्षण पर अंगुली नहीं उठा सकता. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मुलाकात में कहा है कि आरक्षण हमारी लाश पर खत्म होगा.
 
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इसके बाद पासवान ने लोगों को भरोसा दिलाया कि दलित एक्ट से सम्बंधित मामले में केंद्र सरकार की अपील के बाद जल्द सुनवाई होगी. सुशील मोदी जब भाषण के लिए खड़े हुए तब उन्होंने करीब दो मिनट तक 'गूंजे धरती आसमान, रामविलास पासवान' के नारे लगाए. लेकिन उन्होंने अपना भाषण भीड़ का गुस्सा भांपते हुए जल्द खत्म कर दिया. हालांकि रामविलास पासवान ने लोगों से सुशील मोदी को सुनने की अपील की.
 
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इस समारोह में दलितों के रुख से लगता है कि फिलहाल कई मुद्दों पर केवल आश्वासन से वे मानने के लिए तैयार नहीं हैं. हालांकि रविवार को इसी जगह पर इस कार्यक्रम में भाग लेने के किए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी जा रहे हैं.


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