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आख़िर बिहार पुलिस ने ख़ुद माना कि शराब माफ़िया से उनके अधिकारियों की मिलीभगत

इन पांचों थानेदारों पर अपने इलाक़े में शराब की बिक्री के अलावा नशे में पकड़े जाने पर पैसे लेकर रिहा करने का आरोप लगा है और अब ख़ुद पटना ज़ोन के आईजी नैयर हसनैन  खान ने जांच बिठा दी है.

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आख़िर बिहार पुलिस ने ख़ुद माना कि शराब माफ़िया से उनके अधिकारियों की मिलीभगत

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. बिहार में सरकार ने शराब पर रोक लगा दी है
  2. रोक के बाद शराब कारोबारी काफी नाराज है
  3. पुलिस से मिलीभगत कर राज्य में चल रहा अवैध कारोबार.
पटना: ये बात किसी से छिपी नहीं कि बिहार में शराब के अवैध कारोबार में पुलिस वालों की मिलीभगत रहती है. गाहे-बगाहे राज्य सरकार उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की औपचारिकता भी पूरी करती है. लेकिन पहली बार पटना पुलिस ने एक नहीं पाँच थानेदारों की मिलीभगत स्वीकार की है. इन पांचों थानेदारों पर अपने इलाक़े में शराब की बिक्री के अलावा नशे में पकड़े जाने पर पैसे लेकर रिहा करने का आरोप लगा है और अब ख़ुद पटना ज़ोन के आईजी नैयर हसनैन  खान ने जांच बिठा दी है.

पिछले दिनों रोहतास जिले में ज़हरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत के बाद सब जगह समीक्षा, धरपकड़ की प्रक्रिया तेज़ हुई है. राजधानी पटना को शराब मुक्त कराने के लिये हुई बैठक में खान ने स्वीकार किया कि 13 ऐसे थाना अध्यक्ष पाए गए जिनकी शराब माफ़िया के ख़िलाफ़ अभियान में निष्क्रियता जगज़ाहिर है. इसी बैठक में वैसे पांच थाना के प्रभारी मिले जिनकी ना केवल शराब माफ़िया से नज़दीकी हैं बल्कि शराब के नशे में पकड़े गये लोगों से ऊँची रक़म वसूल कर रिहा करने के क़िस्से भी किसी से छिपे नहीं हैं. 

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हालांकि अब डीआईजी को हर हफ़्ते सभी अधिकारियों से समीक्षा कर एक साप्ताहिक रिपोर्ट देने का नया आदेश दिया गया है. जो केवल शराब और उसके अवैध कारोबार से सम्बंधित होगा. इसी के आधार पर थाना के प्रभारी की ग्रेडिंग भी की जाएगी. लेकिन ये क़दम कितना प्रभावी होगा ये इस बात पर निर्भर करता है कि आख़िर इस मुहिम को पुलिस अधिकारी कितनी गम्भीरता से लेते हैं.
VIDEO: शराब को मिटाती बिहार सरकार

राज्य में पिछले साल अप्रैल से शराबबंदी लागू हुई है. तब से अब तक क़रीब 90 हज़ार लोग गिरफ़्तार हो चुके हैं. शराब पीने और इस धंधे में लगे क़रीब 3500 लोग अभी भी जेल की हवा खा रहे हैं. अब तक क़रीब 76 हज़ार से अधिक प्राथमिकी दर्ज हुई लेकिन सज़ा पांच मामलों में भी नहीं हुई. शुरुआती दौर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य पुलिस के आला अधिकारी शराबबंदी के बाद अपराध की घटना में कमी का दावा करते थे लेकिन अब एक बार फिर अपराध में वृद्धि के बाद उन्हें ऐसा दावा करते किसी ने नहीं सुना.


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