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बिहार पुलिस को नीतीश का आदेश मानने में क्यों है परेशानी?

बिहार में विधि व्यवस्था का ये हाल है कि सब तरह के अपराध जैसे हत्या, लूट और डकैती की घटनाओं में वृद्धि हुई है. इसलिए गुरुवार से आपको बिहार के किसी थाने में कोई दाग़ी अधिकारी नहीं दिखेगा.

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बिहार पुलिस को नीतीश का आदेश मानने में क्यों है परेशानी?

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

पटना:

बिहार में 15 अगस्त से पुलिस विभाग में बहुत सारे फेरबदल किए जा रहे हैं. इनमें प्रमुख है कि किसी दाग़ी पुलिस अधिकारी के ज़िम्मे अब थाने का प्रभार नहीं होगा. लेकिन पुलिस वालों का कहना है कि इससे पुलिस बल का मनोबल गिरेगा.

बिहार में विधि व्यवस्था का ये हाल है कि सब तरह के अपराध जैसे हत्या, लूट और डकैती की घटनाओं में वृद्धि हुई है. इसलिए गुरुवार से आपको बिहार के किसी थाने में कोई दाग़ी अधिकारी नहीं दिखेगा. इसके अलावा जांच और विधि व्यवस्था का ज़िम्मा अलग-अलग टीम और अधिकारी के ऊपर होगा.

पुलिस महानिदेशक बाइट गुप्तेशवर पांडेय ने कहा, 'जो दाग़ी पुलिसकर्मी हैं, ऐसे लगभग 400 थानेदारों को जो इन्स्पेक्टर सब-इन्स्पेक्टर रैंक के हैं उनको चिन्हित कर अलग कर दिया गया है. नये लोगों को ज़िम्मेवारी दी गयी है. दो दर्जन डीएसपी पर कारवाई की जा रही है.'

दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लगता है कि जब तक थाने को ठीक नहीं किया जायेगा तब तक अपराध और अपराधियों पर अंकुश नहीं लगेगा. लेकिन पुलिस कर्मियों को लगता है चूक के कारण दस साल तक ज़िम्मेवारी के काम से अलग रखना बहुत कड़ी सज़ा है.


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बिहार पुलिस एसोसिएशन के महामंत्री कपिलेश्‍वर पासवान ने कहा, ‘दाग़ी कोई नहीं है. कोई संगीन अपराध किया हो तब ना दाग़ी है.'

वहीं पुलिस महानिदेशक का कहना है कि हमारी तो एक लाख की फ़ौज है, सौ पचास नाराज़ हैं तो हम क्या करें.'



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