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बिहार में शराबबंदी का सच: सरेआम हो रही है शराब की तस्करी, रिश्वत का भी मामला आया सामने, हुआ अहम खुलासा

बिहार में भले ही शराबबंदी हो लेकिन पुलिस की तमाम कवायद के बावजूद शराब तस्करी से जुड़े कारोबारी से लेकर उत्पाद विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की बल्ले-बल्ले है.

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बिहार में शराबबंदी का सच: सरेआम हो रही है शराब की तस्करी, रिश्वत का भी मामला आया सामने, हुआ अहम खुलासा

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

बिहार में भले ही शराबबंदी हो लेकिन पुलिस की तमाम कवायद के बावजूद शराब तस्करी से जुड़े कारोबारी से लेकर उत्पाद विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की बल्ले-बल्ले है. बंगाल से सटे बायसी में उत्पाद विभाग का चेक पोस्ट है और यहां विभाग के अधिकारी व पुलिसकर्मी तैनात रहते है. इसके बावजूद तस्कर चेक पोस्ट पर तैनात उत्पाद अधिकारियों को एक निश्चित रकम चुकाकर शराब की तस्करी कर लेते हैं. बता दें कि शराब तस्करी से जुड़े अपराधियों ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में यह सनसनीखेज खुलासा किया है. न केवल खुलासा हुआ है बल्कि पुलिस के पास इस बाबत पुख्ता सबूत भी मौजूद हैं. बायसी एसडीपीओ मनोज राम ने भी इस तथ्य की पुष्टि मंगलवार को प्रेस कांफ्रेस में किया है.

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कैसे हुआ उत्पाद विभाग का काला करतूत उजागर

दरअसल 23 जून को दोपहर दो बजे दालकोला के पास स्थित बायसी चेकपोस्ट पर होमगार्ड के जवान राजकपूर यादव को उस समय बाइक सवार तस्कर द्वारा गोली मार दी गई, जब उसे चेक पोस्ट पर रोकने की कोशिश की गई. इसके बाद जब पुलिस ने मामले में मुख्य सरगना डगरुआ थाना के उघेरना गांव के मोहम्मद शाहनवाज आलम और उसके सहयोगी कृष कुमार को गिरफ्तार किया तो जो खुलासे हुए वे बेहद चौकाने वाले थे. एसडीपीओ श्री राम को इस संबंध में जो सबूत हासिल हुए हैं उसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है और चेकपोस्ट पर तैनात संबंधित अधिकारी की मुश्किलें बढ़ सकती है.

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शाहनवाज को देनी पड़ी थी अधिकारियों को 1.50 लाख की रिश्वत

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहली बार जब शाहनवाज शराब के साथ चेकपोस्ट पर पकड़ा गया था तो उसे 1.50 लाख रुपये रिश्वत देनी पड़ी थी. तब उसने 05 फीसदी सैकड़ा की दर से एक स्थानीय महाजन से सूद लिया था. उसके बाद कर्ज चुकाने के लिए वह स्थाई रूप से शराब तस्कर बन गया. इसी तरह शाहनवाज के एक अन्य साथी को भी उत्पाद विभाग से पिंड छुड़ाने के लिए भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ी थी. शाहनवाज के अनुसार, स्थाई रूप से जो भी छोटा-मोटा शराब तस्कर है उसे कम से कम 15 हजार रुपये प्रतिमाह आवागमन कर के रूप में उत्पाद विभाग के अधिकारियों को चुकाना पड़ता है. शाहनवाज के अनुसार, वह कर्ज से दबा था और अब चेक पोस्ट पर रिश्वत देने की स्थिति में नहीं था, लिहाजा तय कर लिया कि अब अगर चेक पोस्ट पर रोका जाएगा तो गोली चलाएगा और ऐसा ही उसने किया. हालांकि उसकी मंशा महज दहशत फैलाना था, लेकिन गोली होम गार्ड को जा लगी. पुलिस ने शाहनवाज के घर से पिस्टल और गोली भी बरामद कर लिया है.

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चर्चित चांद भी हुआ तस्करी मामले में गिरफ्तार

शराब तस्करी की दुनिया का चर्चित चेहरा कटिहार मोड़ निवासी मोहम्मद चांद उर्फ मोहम्मद परवेज को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है. दरअसल गोली चलाने के बाद शाहनवाज सीधे कटिहार मोड़ पहुंचा और मोहम्मद चांद के हवाले सारा शराब कर दिया. शाहनवाज अपना माल चांद को ही बेचने के लिए दिया करता था. गौरतलब है कि चांद पूर्णिया शहर के शराब के शौकीनों खासकर रसूखदार और सफेदपोश लोगों के बीच गहरी पैठ रखता है और गुलाबबाग देह व्यापार की मंडी में भी वही शराब का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. बहरहाल शाहनवाज और चांद की गिरफ्तारी के बाद उत्पाद अधिकारियों और सफेदपोशो के नींद हराम हो गई है.



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