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उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार को बिना मांगे कुर्सी छोड़ने की सलाह क्यों दे रहे?

केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने सीएम नीतीश कुमार को सत्ता में पंद्रह वर्षों तक रहने के बाद कुर्सी छोड़ने की सलाह दी

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उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार को बिना मांगे कुर्सी छोड़ने की सलाह क्यों दे रहे?

उपेंद्र कुशवाहा (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. कुशवाहा ने कहा, बिहार की सत्ता में किसी दूसरे व्यक्ति को मौक़ा देना चाहिए
  2. जेडीयू ने कहा, बयान देने से पहले सोचें, नीतीश जनता के चुने प्रतिनिधि हैं
  3. अमित शाह के इशारे पर नीतीश कुमार को निशाने पर रखकर दिया बयान
पटना: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आजकल उनको सत्ता में समर्थन करने वाले अब सत्ता से विदाई लेने की सलाह दे रहे हैं. ताजा घटनाक्रम में बुधवार को केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने उन्हें सत्ता में पंद्रह वर्षों तक रहने के बाद कुर्सी छोड़ने की सलाह दे दी है.

उपेन्द्र कुशवाहा ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है कि सत्ता में 15 वर्षों तक रहने के बाद नीतीश कुमार को अब बिहार की सत्ता में किसी दूसरे व्यक्ति को मौक़ा देना चाहिए. निश्चित रूप से इस बयान पर जनता दल यूनाइटेड की प्रतिक्रिया काफ़ी तीखी रही है. पार्टी के प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि एक विधायक और दो सांसदों की पार्टी के नेता उपेन्द्र कुशवाहा को ऐसे बयान देने से पहले ये सोचना चाहिए कि नीतीशजी जनता के चुने प्रतिनिधि हैं. बिहार में पिछले पचास साल की राजनीति में वे पहले नेता हैं जिन्हें जनता ने उनके चेहरे पर तीन बार जनादेश दिया. इसलिए कुशवाहा अपनी सलाह अपने पास रखें.

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वहीं कुशवाहा के इस बयान के पीछे राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वे आजकल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के इशारे पर नीतीश कुमार को निशाने पर रखकर बयान दे रहे हैं .शाह ने जहां अपनी पार्टी के नेताओं को नीतीश की तारीफ़ करने का आदेश दिया है जिसके बाद भाजपा का हर नेता और मंत्री नीतीश की तारीफ़ के पुल बांधने में अपने भाषण में दो वाक्य कहना नहीं भूलते. वहीं सहयोगियों से हमला करा शाह नीतीश को ये संदेश देना चाहते हैं कि उनसे गठबंधन के सहयोगियों को दिक्कत है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि नीतीश सीटों के समझौते पर ज़्यादा सीटों के लिए दावे न पेश करें.

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वहीं कुशवाहा के करीबियों का कहना है कि जब से लोकसभा की सीटों का फैसला नीतीश ने भाजपा के ऊपर छोड़ा है तब से ये उनकी मजबूरी हो गई है कि वे सबको खुश करने के लिए यदा-कदा बयान देते रहें. लेकिन इन नेताओं का कहना है कि इससे पहले लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान ने भी नीतीश कुमार के शासन काल में विधि व्यवस्था से संबंधित कई सवाल उठाए थे तब जनता दल यूनाइटेड मौन क्यों रह गई थी.


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