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बिहार : तेजप्रताप यादव को गुस्सा क्यों आता है ?

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) आजकल एक बार सुर्ख़ियों में है. खासकर पार्टी सुप्रीमो तेजप्रताप यादव के बयानों के कारण.

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बिहार : तेजप्रताप यादव को गुस्सा क्यों आता है ?

अक्सर तेजप्रताप यादव बगावती मूड में नजर आते हैं.

खास बातें

  1. जानकारों के मुताबिक लालू यादव के कुनबे में छिड़ सकता है गृह युद्ध
  2. पार्टी में वर्चस्व को लेकर तेजप्रताप यादव नजर आ रहे हैं बगावत के मूड में
  3. आने वाले दिनों में लालू परिवार की लड़ाई और बढ़ सकती है
पटना : राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) आजकल एक बार सुर्ख़ियों में है. खासकर पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद के बेटे तेजप्रताप यादव के बयानों के कारण. सोमवार को उनके फेसबुक से एक पोस्ट किया गया, लेकिन कुछ घंटों के अंदर ही उन्होंने परिवार के दबाव में अकाउंट हैक होने का बहाना बनाया और इसका सारा ठीकरा विरोधियों ख़ासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरएसएस पर फ़ोड़ दिया. हालांकि सब जानते हैं कि तेज प्रताप ने ही फेसबुक पर अपने मन की भड़ास निकाली थी.

जानकार मानते हैं कि लालू यादव भले ही बीमार हों, लेकिन उनके बच्चों को इस बात की परवाह नहीं है. परिवार में एक गृह युद्ध छिड़ गया है. तेजप्रताप को इस बात का मलाल है कि उन्हें कोई गंभीरता से नहीं लेता. जबकि राजद के नेताओं का मानना है कि वे ख़ुद ही इसके लिए ज़िम्मेदार हैं. पार्टी में शुरू से उनकी छवि एक ऐसे नेता पुत्र की रही है जो किसी को अपने ज़ुबान से नाराज़ कर सकता है. माना जाता है कि तेजप्रताप के रवैए से आजिज़ होकर ही वर्तमान में केंद्रीय मंत्री और एक ज़माने में लालू यादव के सबसे क़रीबी रामकृपाल यादव ने पार्टी को बाय-बाय कहा था. वह तेजप्रताप के व्यवहार से व्यथित थे और लालू यादव ने भी उस समय अपने बेटे के सामने रामकृपाल यादव जैसे नेता को जाने दिया.

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अब वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए तेज़प्रताप और तेजस्वी यादव की मां राबड़ी देवी को जिम्मेदार माना जा रहा है. जिन्होंने अपने संबंधियों के बेटों को अपने अलावा अपने दोनो बेटों के निजी सहायक में नियुक्त कराया. शुरू- शुरू में तो सब कुछ ठीक चला, लेकिन जैसे-जैसे तेजस्वी यादव का कद बढ़ता गया तेज़ प्रताप का कद और छोटा होता गया. उनके साथ के लोगों को भी लगा कि पार्टी का भविष्य और निजी भविष्य तेजस्वी यादव के साथ रहने में है, लेकिन जब से तेजप्रताप यादव की शादी हुई है उसके बाद से उनके अंदर पार्टी के अंदर अपनी धाक ज़माने की इच्छा और प्रबल हुई है. इसलिए उन्होंने अपने समर्थकों के माध्यम से अपने भाई के क़रीबी और अपने संबंधियों पर सीधा निशाना साधना शुरू किया है. हालांकि शुरुआत में तो लालू यादव की वजह से उनका मान-मनौव्वल ख़ूब हुआ, लेकिन अब साफ़ हैं कि उनकी बेताबी दो वजहों से है. पहली यह कि वह बयानों के माध्यम से सुर्ख़ियां बटोरना चाहते हैं और दूसरा उन्हें अपने भाई का राजनीतिक क़द पच नहीं रहा हैं.  

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कई वरिष्ठ नेताओं का मानना हैं कि जहां तक राजनीतिक शिष्टाचार का सवाल है, वहां तेजस्वी और उनके आसपास के सहायक भी अपनी मनमानी करते हैं, लेकिन लालू यादव के कारण कोई खुल कर नहीं बोल पाता. कई नेता मानते हैं कि एक ज़माने में जैसे राबड़ी देवी के दो भाई साधु और सुभाष यादव के कारण सरकार और पार्टी की किरकिरी होती थी, कमोबेश इस समय वही हालात फिर बन गए हैं. हालांकि कई विधायक ये भी मानते हैं कि तेजप्रताप के शब्दों के पीछे भावना उनकी बहन मीसा भारती के होते हैं. वह इस पूरे परिवार में वर्चस्व की लड़ाई में तटस्थ होने के बजाय फ़िलहाल तेजप्रताप यादव के साथ खड़ी है. वर्तमान में जो हालात हैं उसे देखते हुए लगता है कि लालू यादव के परिवार में वर्चस्व की लड़ाई आने वाले समय में और तेज होगी और कुनबे की लड़ाई पर सभी की नजर होगी. 

 
क्या हो रहा है तेजप्रताप और तेजस्वी के बीच?  


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