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बिहार की 'डर्टी पिक्चर' : कौन सा राजनीतिक दल कितना गंदा है...

निश्चित रूप से भाषा की मर्यादा का ख़्याल कोई नहीं रख रहा. ग़लती सब कर रहे हैं. लेकिन एक दूसरे की डर्टी पिक्चर में बिहार की राजनीति की एक गंदी तस्वीर ज़रूर जगज़ाहिर हो गई.

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बिहार की 'डर्टी पिक्चर' : कौन सा राजनीतिक दल कितना गंदा है...

प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में तेजस्‍वी यादव

खास बातें

  1. जेडीयू के प्रवक्ताओं ने तेजस्वी का सालों पुराना एक फ़ोटो जारी किया
  2. तेजस्वी ने CM से पूछा था कि कोई आरोपी उनके ड्रॉइंग रूम तक कैसे पहुंच गया
  3. निश्चित रूप से भाषा की मर्यादा का ख़्याल कोई नहीं रख रहा
पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों 'डर्टी पिक्चर' का दौर चल रहा है. सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड और अब मुख्य विपक्षी प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय जनता दल में इस बात की होड़ लगी है कि कौन अपने विरोधी की कितनी डर्टी पिक्चर खोज कर मीडिया के सामने रखता है.

ये पूरा मामला रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक दहेज विरोधी महानुभाव हरेन्द्र सिंह से मुलाक़ात से शुरू हुआ. हरेन्द्र सिंह बिहार के भोजपुर के हैं तो नीतीश ने उनसे मिलने को इच्छा ज़ाहिर की, तब उनके भोजपुर के ज़िला अध्यक्ष भी साथ हो लिए. उन्होंने भोजपुर ज़िला के एक प्रखंड अध्यक्ष राकेश सिंह को भी साथ रख लिया और राकेश ने मुख्यमंत्री आवास में मौक़े का जमकर लाभ उठाते हुए नीतीश के साथ ड्रॉइंग रूम से लेकर पोर्टिको तक में सेल्फ़ी ली और फेसबुक पर डाल दिया. लेकिन शायद राकेश ये अनुमान लगाना भूल गए कि उनके चाहने वाले मतलब राजनीतिक विरोधी उनका राजनीतिक जनजा निकाल देंगे. तुरंत राकेश के एक ज़हरीली शराब कांड में आरोपी होने की ख़बर आयी और उसकी पुष्टि भी हुई.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बात की ख़बर लगी और तथ्यों की जानकारी लेकर उन्होंने पटेल जयंती पर अपने भाषण में इसका ज़िक्र करते हुए कहा कि राकेश निर्वाचित अध्यक्ष थे, मतलब उन्हें पद से हटा दिया गया है. लेकिन नीतीश ने ये क्या कह दिया कि ना उन्हें ना ही पार्टी के राज्य अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को और ना ही ज़िला अध्यक्ष जिन्होंने अब अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है, उन्हें राकेश के पृष्‍ठभूमि के बारे में जानकारी थी. इस बीच विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव इस प्रकरण पर सोशल मीडिया के माध्यम से हमले किए जा रहे थे.

तेजस्वी ने कुछ सवाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से किए जिनमें ये प्रमुख था कि कोई आरोपी उनके ड्रॉइंग रूम तक कैसे पहुंच गया. इसके अलावा उन्होंने सबके इस्तीफ़े की मांग की. लेकिन इससे कुछ घंटे पूर्व लालू यादव ने कुछ गम्भीर आरोप लगाए. लालू के निशाने पर नीतीश के क़रीबी आरसीपी सिंह थे जिनके ऊपर उन्होंने पैसा लेकर अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग के अलावा राज्य में शराब और बालू माफ़िया को संरक्षण देने तक के आरोप लगाए.

तब आरसीपी सिंह ने जवाब दिया कि लालू जी अपने आरोपों के समर्थन में कुछ साक्ष्य लाएं जो शायद तेजस्वी को नागवार गुज़रा, ख़ासकर यह बात कि लालू यादव के घर में सब बेटे ग्रैजूएट भी नहीं हैं. तेजस्वी ने फिर फ़ोटो पर नीतीश कुमार से सफ़ाई मांगी और कुछ और आरोप लगाए. तेजस्वी ने स्वीकार किया कि भले नीतीश से वो सफ़ाई मांग रहे हों लेकिन उनके पिता अगर बलात्कार के मामले के आरोपी पार्टी विधायक राजभल्लव यादव से मिलते हैं तब उसमें कोई ख़राबी उन्हें नज़र नहीं आती. या एक पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या में चार्जशीटेड मोहम्मद शहाबुद्दीन उनकी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य है और रहेगा. निश्चित रूप से राजद काके दूसरों से तो सामाजिक मर्यादा का पालन करने का अपेक्षा रहती है लेकिन बात अगर उनकी अपनी पार्टी या नेता की हो तब वो कुछ भी नहीं मानते.
 
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लेकिन शुक्रवार को जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ताओं संजय सिंह, नीरज कुमार और निखिल मंडल ने एक संवादाता सम्मेलन कर तेजस्वी यादव का सालों पुराना एक फ़ोटो जारी किया. निश्चित रूप से राजनीति में जनता दल अब राजद के स्तर पर आकर जवाब दे रही थी जिसकी उम्मीद लोग नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली पार्टी से नहीं ही रखते हैं. यहां ज़ुबान चली और जमकर फिसली. और जनता दल यूनाइटेड के नेता मानते हैं कि ये संवादाता सम्मेलन अनावश्यक था.

VIDEO: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तेजस्‍वी का तीखा हमला

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इसके बाद राजद और तेजस्वी यादव ने जनता दल यूनाइटेड का हिसाब किताब बराबर कर दिया. तेजस्वी यादव के साथ शिवानंद तिवारी भी थे और जब बाबा बोलने लगते हैं तब अपनी आक्रामकता में सार्वजनिक और राजनीतिक मर्यादा को कहां ताक पर रखते हैं, उन्हें भी नहीं मालूम चलता. तेजस्वी ने अपने फ़ोटो को ये कहकर ख़ारिज कर दिया कि वो उनके क्रिकेट के दिनों की पार्टी की फ़ोटो है. लेकिन उन्होंने कई सारे सवाल किए जो एक विपक्ष के नेता से ज़्यादा पार्टी प्रवक्ता के स्तर के दिखे.

निश्चित रूप से भाषा की मर्यादा का ख़्याल कोई नहीं रख रहा. ग़लती सब कर रहे हैं. लेकिन एक दूसरे की डर्टी पिक्चर में बिहार की राजनीति की एक गंदी तस्वीर ज़रूर जगज़ाहिर हो गई.


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