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बिहार के शिक्षा मंत्री बोले, परेशानी से बचने के लिए परीक्षार्थी जूता-मोजा की जगह चप्पल पहन कर आएं

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा आयोजित 10वीं (मैट्रिक) की परीक्षा में सोमवार खबर आई थी कि इस साल परीक्षार्थी जूता-मोजा (जुराब) पहनकर नहीं जा सकेंगे.

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बिहार के शिक्षा मंत्री बोले, परेशानी से बचने के लिए परीक्षार्थी जूता-मोजा की जगह चप्पल पहन कर आएं

पत्रकारों के सवाल का जवाब देते बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा

पटना: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा आयोजित 10वीं (मैट्रिक) की परीक्षा में सोमवार खबर आई थी कि इस साल परीक्षार्थी जूता-मोजा (जुराब) पहनकर नहीं जा सकेंगे. इस बाबत बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा ने कहा कि मैट्रिक की परीक्षा में जांच के नाम पर जूता-मोजा उतारने से बेहतर है कि परीक्षार्थी चप्पल पहन कर आएं, ताकि ना तो उन्हें दिक्कत हो और न ही जांच के नाम पर परीक्षार्थियों को परेशान होना पड़े. 

 गौरतलब है कि BSEB द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि परीक्षा भवन में उन्हीं परीक्षार्थियों को प्रवेश करने दिया जाएगा जो चप्पल पहनकर आएंगे. इसके बाद राजनीतिक दलों ने इसे तालीबानी आदेश बताया था. हालांकि, शिक्षा मंत्री ने कहा कि सूबे में अब कदाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सूबे के लोगों का भी कदाचार मुक्त परीक्षा में सहयोग मिल रहा है. 

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बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने सोमवार को बताया था, 'इस साल परीक्षार्थियों को जूता-मोजा पहनकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी. परीक्षार्थियों को चप्पल पहनकर ही आना होगा. इसके लिए संबंधित जिले के सभी शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है.' किशोर ने कहा, 'अगर कोई परीक्षार्थी जूता-मोजा पहनकर आएगा तो उससे परीक्षाहॉल के बाहर ही जूता-मोजा उतरवा लिया जाएगा. परीक्षा हॉल में परीक्षार्थी को सिर्फ एडमिट कॉर्ड और पेन व पेंसिल ही ले जाने की अनुमति होगी. प्रवेश द्वार पर ही सभी परीक्षार्थियों की गहन जांच की जाएगी.'

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बता दें कि इस साल 21 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित होने वाली मैट्रिक की परीक्षा में 17.68 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे. इन परीक्षार्थियों के लिए 1426 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. बीएसईबी का दावा है कि परीक्षा को कदाचारमुक्त संपन्न कराने के लिए पूरी व्यवस्था की जा रही है. 
 
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