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जेडीयू की नीतीश के नेतृत्व और चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात को बीजेपी बेतुका क्यों मानती है?

भाजपा नेताओं का मानना है कि जनता दल के नेताओं का वक्तव्य भाजपा से ज़्यादा जनता दल यूनाइटेड के नेता और कार्यकर्ताओं को संदेश भेजने की क़वायद है कि फ़िलहाल वो नरेंद्र मोदी के सामने पूरी तरह नतमस्तक नहीं हुए हैं.

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जेडीयू की नीतीश के नेतृत्व और चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात को बीजेपी बेतुका क्यों मानती है?

बीजेपी नेताओं का कहना है कि फिलहाल नीतीश के चेहरे का तो कोई सवाल ही नहीं है.

खास बातें

  1. जेडीयू नीतीश को बिहार में बनाना चाहती है एनडीए का चेहरा
  2. उपचुनाव के बाद एनडीए के सहयोगी दलों का बदला मिजाज
  3. बीजेपी नेता जेडीयू की इस बात को नहीं दे रहे हैं तवज्जो
पटना: बिहार की राजनीति में भाजपा के सहयोगी सभी दल पिछले हफ़्ते के लोक सभा और विधान सभा उपचुनाव के नतीजों के बाद अब अपनी अपनी शर्तें गिना रहे हैं. उपेन्द्र कुशवाह और रामविलास पासवान के बाद नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने रविवार को एक बैठक के बाद कहा कि लोकसभा या विधानसभा का चुनाव बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व और चेहरा पर लड़ा जाना चाहिए. हालांकि जनता दल यूनाइटेड के इस मांग पर भाजपा की अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है. लेकिन भाजपा के बिहार नेता कहते हैं कि अगर जेडीयू को नीतीश कुमार के चेहरे पर इतना अतिआत्मविश्वास है तो विधानसभा उपचुनाव में हर बार तीस हज़ार से अधिक से उनके प्रत्याशियों की हार कैसे हो जाती है. फ़िलहाल भाजपा की कोशिश है कि सभी सहयोगियों को एक साथ रखा जाये इसलिए ख़ुद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साथ मिलकर सबकी बात सुन रहे हैं. 

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लेकिन भाजपा के सूत्रों का कहना हैं कि नीतीश कुमार को भी मालूम हैं कि वो एक ऐसी शर्त अपने प्रवक्ताओं के माध्यम से रख रहे हैं जो भाजपा के किसी कार्यकर्ता और नेता को स्वीकार नहीं होगी. अगले साल लोकसभा चुनाव में ये तय होना है कि देश और बिहार की जनता वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक और मौक़ा देना चाहती है या नहीं तब नीतीश कुमार के चेहरे का क्या सवाल है. हां, विधानसभा में उनके चेहरे पर फ़िलहाल कोई सवाल नहीं है.

वीडियो : तेजस्वी का नीतीश पर निशाना

भाजपा नेताओं का मानना है कि जनता दल के नेताओं का वक्तव्य भाजपा से ज़्यादा जनता दल यूनाइटेड के नेता और कार्यकर्ताओं को संदेश भेजने की क़वायद है कि फ़िलहाल वो नरेंद्र मोदी के सामने पूरी तरह नतमस्तक नहीं हुए हैं. लेकिन अब सात जून को एनडी के नेताओं जिसमें सभी दलों के विधायक सांसद शामिल होंगे उस पर सबकी निगाहें होंगी कि कौन आख़िर क्या बोलता है.
 


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