51 साल बाद हुए बिहार विधानसभा स्पीकर चुनाव में बीजेपी के विजय सिन्हा जीते

बिहार विधानसभा में अध्यक्ष पद के लिए NDA के उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा ने 51 वर्षों के अंतराल के बाद इस पद के लिए हुए चुनाव में जीत दर्ज की.

पटना:

बिहार विधानसभा में अध्यक्ष पद के लिए NDA के उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा ने 51 वर्षों के अंतराल के बाद इस पद के लिए हुए चुनाव में जीत दर्ज की. राज्य भाजपा के एक वरिष्ठ नेता, सिन्हा को प्रो-टेम अध्यक्ष जीतन राम मांझी द्वारा निर्वाचित घोषित किया गया, मांझी ने सदन को बताया कि एनडीए के उम्मीदवार को अवध बिहारी चौधरी के 114 वोटों के मुकाबले 126 वोट मिले. चौधरी को विपक्षी महागठबंधन ने मैदान में उतारा था.

विपक्ष के हंगामे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधानसभा के निचले सदन के सदस्य नहीं होने और सदन से जाने की मांग  के बीच चुनाव हुआ. चेयर द्वारा मांगों को ठुकरा दिया गया था, जिसके दौरान विपक्ष को विरोध प्रदर्शन करना पड़ा, जिसके दौरान सदन स्थगित करना पड़ा.

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शुरुआत में, जब चुनाव ध्वनिमत से किया गया था और प्रो-टेम अध्यक्ष ने कहा कि सिन्हा को बहुमत मिला था, विपक्ष ने हंगामा किया. महागठबंधन के तेजस्वी यादव ने मांग की कि कार्यवाही "लोकतांत्रिक मानदंडों के अनुसार हो, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अध्यक्ष सदन का है, न कि सरकार या विपक्ष का."

प्रो-टेंप स्पीकर ने तब हेड काउंट के लिए कहा, जिसमें सदस्यों को अपने पसंदीदा उम्मीदवार के पक्ष में खड़े होने के लिए कहा गया. इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने ट्वीट कर आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे. एक कथित ऑडियो में आरजेडी प्रमुख ने भाजपा के एक सदस्य को मतदान करने से रोकने के लिए कहा.

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भाजपा विधायक ललन पासवान ने सदन में कहा, "उन्होंने (लालू यादव) ने फोन किया और मुझे मतदान के लिए नहीं जाने के लिए कहा." राजद सदस्य वीरेंद्र ने विरोध करते हुए कहा, "यह गलत है और ऐसे बहुत से लोग हैं जो लालू-जी की आवाज की नकल कर सकते हैं.

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बता दें कि बिहार में निर्वाचित पिछली 16 विधानसभाओं में, स्पीकर को केवल दो बार चुनाव में चुना गया है. पहली बार 1967 में, जब राज्य ने अपनी पहली गैर-कांग्रेसी सरकार को देखा था, और दो साल बाद, जब मध्यावधि चुनावों के बाद एक नई विधानसभा का गठन किया गया था.