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नहर की दीवार टूटी, जांच जारी, लेकिन केंद्र और बिहार सरकार में वाकयुद्ध शुरू

एनटीपीसी ने बिहार के भागलपुर में नहर का बांध टूटने के आरोप को ‘बेबुनियाद और सच्चाई से परे’ बताया है.

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नहर की दीवार टूटी, जांच जारी, लेकिन केंद्र और बिहार सरकार में वाकयुद्ध शुरू

कहलगांव में करोड़ों की लागत से बना बांध टूटने के बाद इस मुद्दे राजनीति जारी है...

पटना: नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन को इस बात पर आपत्ति है कि बिहार सरकार ने जांच किए बिना भागलपुर स्थित बटेश्वर गंगा पंप नहर परियोजना के कैनाल की दीवार गिरने के लिए उन्हें जिम्मेवार मान लिया. NTPC ने गुरुवार को बाकायदा एक एक प्रेस रिलीज़ जारी करके इसका खंडन किया. केंद्र सरकार के ऊर्जा विभाग के प्रतिष्ठान ने बिहार के जल संसाधन मंत्री लल्लन सिंह द्वारा दिए गए वक्तव्य का बिंदुवार खंडन किया है. NTPC ने सभी आरोपों को तथ्यहीन और सच से परे बताते हुए कहा कि इस अंडरपास का निर्माण सिचाई विभाग द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के बाद किया गया था. बयान में मंत्री के इस संबंध में उस कथन को भी गलत करार दिया गया हैं कि अंडरपास में विंग वॉल और रिटर्निंग वॉल का निर्माण नहीं कराया गया था.

कंपनी का दवा है कि अंडरपास का निर्माण कैनाल के काम के ख़त्म होने के बाद किया गया है. सबसे बड़ा आरोप इस प्रेस विज्ञप्ति में एनटीपीसी द्वारा बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के अधिकारियो और कर्मचरियो पर ये लगाया गया है कि कैनाल से पानी का रिसाव बारिश के मौसम में सबकी जानकारी में होता था लेकिन इसके बाबजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.  

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हालांकि बिहार के जल संसाधन मंत्री लल्लन सिंह का कहना हैं कि 2005 में विभाग के द्वारा एनटीपीसी को 2005 में लिखा गया था कि अंडरपास का निर्माण बिना किसी अनुमति के हो रहा है. इसके अलावा नहर बनाने के कार्य में भी पॉवर प्लांट के कर्मचारियों द्वारा अवरोध किया जा रहा है. हालांकि सिंह ने इस बात से भी इनकार किया कि इस परियोजना का काम बिना पूरा हुए इसके उद्घाटन की तैयारी की जा रही थी. उनका कहना है कि नहर का अधिकांश हिस्सा तैयार हैं. उनका मानना है ये करीब 32 वर्षों से बनकर तैयार है लेकिन कहीं-कहीं कमजोर होने के कारण रिसाव हो सकता है. इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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लल्लन सिंह ने इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया कि विभाग के कुछ कर्मचारियों की लापरवाही के कारण कैनाल का दीवार टूटा है. वो मानते हैं कि उद्घाटन के एक दिन पहले जो टेस्ट किया जा रहा था उसे थोड़ा पहले कर लेना चाहिए था.  

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एनटीपीसी के बयान के बाद अब सवाल है कि बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के सचिव द्वारा जांच कितनी निष्पक्ष होगी क्योंकि उन्हीं के विभाग के ऊपर आरोप भी लग रहे हैं. ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियो का कहना है कि बेहतर होता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले की जांच किसी विशेषज्ञ दल को दे देते. विभाग के प्रधान सचिव अब खुद भी एक पार्टी हैं. इस बीच इस मुद्दे राजनीति जारी है. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ट्विटर के माध्यम से नीतीश कुमार पर आज भी निशाना साधा.


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