बाल दिवस : चाचा नेहरू आप देख रहे हैं ना, कंकड़-पत्थर है इनकी जिंदगी

स्कूलों में आज के दिन कई कार्यक्रम होते हैं लेकिन देश कितने बच्चे कुपोषण और बच्चे बीमारी की वजह से दम तोड़ रहे हैं तो कितने बचपन पेट की आग बुझाने के लिए आज भी कूड़ा-करकट और नदी किनारे जोखिम उठाकर कंकर पत्थर बिनते नजर आ जाएंगे.

बाल दिवस : चाचा नेहरू आप देख रहे हैं ना, कंकड़-पत्थर है इनकी जिंदगी

पंडित नेहरू के जन्मदिन पर बालदिवस मनाया जाता है लेकिन इन बच्चों का क्या?

खास बातें

  • बाल दिवस मनाओ पर इनकी बच्चों की सुध कौन लेगा
  • आजादी के इतने सालों के बाद भी कहां हैं हम
  • बिहार से आई ये तस्वीरें खड़े करती है सवाल
पटना:

आज पूरे देश में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन मना रहा है. बच्चों के बीच चाचा के नाम से लोकप्रिय नेहरू जी के जन्मदिन को बालदिवस के रूप में भी मनाया जाता है. स्कूलों में आज के दिन कई कार्यक्रम होते हैं लेकिन देश कितने बच्चे कुपोषण और बच्चे बीमारी की वजह से दम तोड़ रहे हैं तो कितने बचपन पेट की आग बुझाने के लिए आज भी कूड़ा-करकट और नदी किनारे जोखिम उठाकर कंकर पत्थर बिनते नजर आ जाएंगे. बिहार के अरवल जिले में पेट की आग बुझाने के लिए सोन नदी के तलहटी से पत्थर निकालकर बेचते हैं. ये तस्वीरें सरकारी के दावों और वादों की पोल खोलती हैं.

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बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ साथ मानसिक और शारीरिक विकास के लिए भले ही केंद्र और राज्य की सरकार कई योजनाएं चला रही हो, लेकिन इन योजनाओं का लाभ समाज के निचले तबके के बच्चों को नहीं मिल पा रहा है. आज भी कई ऐसी तस्वीरें सामने आती है जिसे देखकर ऐसा लगता है कि विकास सिर्फ कागजों में ही सिमटा है.

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ये बच्चे जान जोखिम में डालकर नदी में उतरते हैं और उसकी तलहटी से कंकर-पत्थर चुन कर जमा करते हैं. जिसे वह 15 से 20 रुपया गैलन बेचते हैं.  कूड़ा-कचरा चुनते बच्चे तो हर जगह दिखाई पड़ जाता हैं. इतना ही नहीं पेट की आग बुझाने के लिए होटल और दूसरी जगहों पर काम करते भी ये बच्चे हर जगह दिखते हैं जिन्हें हम  'छोटू' कहते हैं.

 

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