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भाजपा नेता राम माधव के ट्वीट से क्यों खड़ा हुआ इतना विवाद? जानें पूरा मामला

भाजपा नेता राम माधव द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में किए गए ट्वीट से विवाद खड़ा हो गया है.

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भाजपा नेता राम माधव के ट्वीट से क्यों खड़ा हुआ इतना विवाद? जानें पूरा मामला

भाजपा नेता राम माधव (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. नालंदा यूनिवर्सिटी में योग से जुड़े कोर्स के बारे में राम माधव का ट्वीट
  2. पूर्व चांसलर अमर्त्य सेन पर साधा निशाना
  3. हालांकि अमर्त्य सेन उससे पहले ही यूनिवर्सिटी छोड़ चुके थे
पटना: भाजपा नेता राम माधव द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में किए गए ट्वीट से विवाद खड़ा हो गया है. माधव ने शनिवार को एक के बाद एक ट्वीट कर कहा कि पूर्व चांसलर अमर्त्य सेन के समय 'योग की राजनीति' नामक कोर्स शुरू की गई. लेकिन जानकारों के अनुसार ये कोर्स 'योग की राजनीति' नहीं, बल्कि 'योग का इतिहास और राजनीति' नाम से इस साल जनवरी में शुरू की गई. उस समय न ही अमर्त्य सेन चांसलर थे और न ही संस्थापक वाइस चांसलर गोपा सभरवाल. अमर्त्य सेन ने नवंबर, 2016 में सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज यो को चांसलर की कमान सौंप दी थी.
 
वहीं गोपा सभरवाल की जगह नए कुलपति पिछले साल आ गए थे. राम माधव की दूसरी आपत्ति इस बात को लेकर थी कि इस कोर्स को एक विदेशी शिक्षक पढ़ा रही थीं, लेकिन इस कोर्स में मात्र पांच विद्यार्थी थे.

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राम माधव के अनुसार अब उस विदेशी शिक्षक की छुट्टी कर दी गई है. हालांकि शिक्षक पैट्रिसिया साउथोफ अब नालंदा से जा चुकी हैं.
 
जानकारों के अनुसार नालंदा यूनिवर्सिटी को अब एक राजनीति का अखाड़ा बनाया जा रहा है और जानबूझकर हमेशा अमर्त्य सेन को निशाने पर रखकर एक भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जाती है.

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पिछले कुछ महीनों में कई फैक्लटी मेंबर यहां से इस्तीफा देकर जा चुके हैं और नए कोर्सेज में भी छात्रों की संख्या में गिरावट आई है.


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