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राज्यसभा में तीन तलाक बिल पर नीतीश कुमार ने इस तरह की मोदी सरकार की मदद

तीन तलाक के मुद्दे पर राज्यसभा में जनता दल यूनाइटेड के रुख से साफ है कि वह बिहार में विधानसभा चुनाव बीजेपी के साथ लड़ेगा

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राज्यसभा में तीन तलाक बिल पर नीतीश कुमार ने इस तरह की मोदी सरकार की मदद

पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. राज्यसभा में तीन तलाक बिल पर मोदी सरकार की मदद की
  2. वोटिंग का बहिष्कार करके बिल पारित होने की राह आसान बनाई
  3. तीन तलाक बिल पर असहमति जताने के साथ की बीजेपी की मदद
पटना:

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अगले साल विधानसभा चुनाव बीजेपी (BJP) के साथ गठबंधन में ही लड़ेंगे. इसका संकेत मंगलवार को तीन तलाक (Teen Talaq Bill) के मुद्दे पर राज्यसभा (Rajya Sabha) में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के रुख से मिला. जनता दल यूनाइटेड के राज्यसभा सांसदों के बिल के खिलाफ मतदान से यह बिल खतरे में पड़ सकता था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर ही पार्टी के सभी सांसदों ने बजाय मतदान में बाग लेने के सदन का बहिष्कार कर दिया. इससे केंद्र सरकार को न केवल राहत मिली बल्कि इस बिल के राज्यसभा में पारित होने का रास्ता भी आसान हो गया.

सोमवार को रात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से बातचीत हुई. उन्होंने ट्वीट किया, जिसमें विषय बाढ़ के बाद की स्थिति का आकलन और हर संभव मदद का आश्वासन बताया. लेकिन इस बातचीत के वास्तविक आशय को लेकर राजनीतिक गलियारे में किसी को कोई कन्फ्यूजन नहीं रहा. माना गया कि जनता दल यूनाइटेड मंगलवार को राज्यसभा में ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर वोटिंग की नौबत आएगी तो सांकेतिक विरोध कर सदन का बहिष्कार करेगा और इस तरह सरकार की मदद भी करेगा.


जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है कि सदन के बहिष्कार को तिल का ताड़ बनाया जा रहा है. उन्होंने तो पिछले हफ़्ते लोकसभा में भी सदन का बहिष्कार किया था.  हालांकि लोकसभा में बीजेपी के प्रचंड बहुमत के कारण जेडीयू के सदन में मौजूद रहकर विरोध में वोटिंग करने से भी इस बिल के पारित होने में कोई खतरा नहीं था. दूसरी तरफ यह सभी जानते हैं कि राज्यसभा में जो पक्ष-विपक्ष का आंकड़ा है उस स्थिति में जनता दल यूनाइटेड अगर ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपने विरोध को आधार बनाकर वोटिंग करता तो सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती थीं.

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राजनीतिक जानकारों का मानना हैं कि भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर सार्वजनिक मुद्दे पर नीतीश कुमार की मांगों को अनसुना करते हों लेकिन अब नीतीश कुमार की वह राजनीतिक हैसियत नहीं रही कि वे उनके विरोध में खड़े हों. बदली हुई जमीनी हकीकत यही है कि नीतीश एक सीमा से ज़्यादा बीजेपी और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी आग्रह को न नहीं कर सकते.

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हालांकि जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है नीतीश कुमार का कदम उनके राजनीतिक स्वभाव के अनुरूप था कि चित भी मेरा और पट भी मेरा. एक तरफ भाषण में विरोध करके उन्होंने इस मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय में उबाल पर अपने आपको उनके साथ खड़ा किया, वहीं सदन से वोटिंग से पहले निकलकर बीजेपी को भी संदेश दिया कि जब हमारी जरूरत होगी तो कम से कम हमारी तरफ से आपको मुश्किलों का सामना नहीं करना होगा.

VIDEO : तीन तलाक बिल और राज्यसभा का गणित

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