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मोदी सरकार के एक फैसले से अंदर ही अंदर उबल रहे हैं नीतीश कुमार, सहयोगियों को बताई मन की बात

केंद्र ने राज्य की 7600 करोड़ की मांग के बदले 1700 करोड़ रुपये दिए, अंतिम राशि 1200 करोड़ से कुछ अधिक मिली

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मोदी सरकार के एक फैसले से अंदर ही अंदर उबल रहे हैं नीतीश कुमार, सहयोगियों को बताई मन की बात

पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो).

खास बातें

  1. पीएम ने बाढ़ प्रभावित इलाक़ों के दौरे के बाद 500 करोड़ की राशि काटी
  2. नीतीश कुमार केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अंतिम स्वीकृत राशि को लेकर ख़फ़ा
  3. बिहार में पिछले साल बाढ़ में 500 से अधिक लोगों की मृत्य हो गई थी
पटना: बिहार में पिछले साल बाढ़ राहत के बदले केंद्र ने राज्य की क़रीब 7600 करोड़ की मांग के बदले 1700 करोड़ रुपये दिए. लेकिन अंतिम राशि बिहार सरकार को 1200 करोड़ से कुछ अधिक मिली क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाक़ों के दौरे के बाद 500 करोड़ की राशि की कटौती की गई है. जानकारों का कहना है कि बाढ़ के समय प्रधानमंत्री मोदी के उस समय की प्रतिक्रिया से उत्साहित बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अंतिम स्वीकृत राशि से ख़फ़ा हैं. उन्होंने अपनी नाराजगी अपने मंत्रिमंडल के इस विषय से सम्बंधित विभाग के सहयोगियों और अधिकारियों के सामने कई बार जताई है. नीतीश कुमार को उम्मीद थी कि कम से कम राज्य को नुकसान के बदले मांग की पचास प्रतिशत राशि के लिए केंद्र द्वारा मंज़ूरी मिल जाती. लेकिन उन्हें ये भी मालूम है कि इस विषय पर प्रधानमंत्री द्वारा कोई विशेष रुचि न दिखाए जाने के कारण मांग की करीब बीस प्रतिशत राशि दी गई.

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हालांकि उनके मंत्रिमंडल में भाजपा के मंत्रियों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के बिहार की आपदा में विशेष ध्यान के कारण केंद्रीय टीम जल्द आई. उसी टीम की रिपोर्ट के आधार पर और अन्य मानक को ध्यान में रखते हुए अब तक की सबसे अधिक केंद्रीय सहायता राज्य को मुहैया कराई गई. लेकिन उनका ये भी कहना है कि ऐसे बहुत कम उदाहरण हैं जब राज्य ने मांग की और उसे केंद्र में बैठी सरकार ने पूरा मान लिया.  

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हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल हर व्यक्ति अपने बचाव में एक तर्क ढूंढ रहा है, लेकिन सच्चाई यही है कि केंद्र ने बिहार सरकार द्वारा करीब 22 करोड़ से अधिक प्रभावित परिवारों के खाते में छह हज़ार प्रति परिवार नगद राशि का भुगतान किया था. बिहार में पिछले साल बाढ़ में 500 से अधिक लोगों की मृत्य हो गई थी और उन्नीस जिलों में डेढ़ करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए थे.


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