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क्या नीतीश अब भाजपा का विश्वास जीतना चाहते हैं ?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब भाजपा का विश्वास जीतने के लिए किसी हद तक जाने के लिए तैयार हैं.

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क्या नीतीश अब भाजपा का विश्वास जीतना चाहते हैं ?

पीएम मोदी और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब भाजपा का विश्वास जीतने के लिए किसी हद तक जाने के लिए तैयार हैं. ऐसा उनकी भाषा से ज़्यादा पिछले चौबीस घंटे के दौरान उनके क़दमों से उनके समर्थक और विरोधियों को प्रतीत होता हो रहा है. नीतीश कुमार मंगलवार को शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए विशेष विमान से सुबह तीन बजे अहमदाबाद के लिए पटना से प्रस्थान किया.

नीतीश ने अहमदाबाद में कहा कि उन्होंने पहले ही जीत की भविष्यवाणी कर दी थी और लगे हाथ उन्होंने अगले लोक सभा चुनाव में भी मोदी लहर की भी भविष्यवाणी कर डाली. बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सवाल भी किया कि ये लोग इतनी नैतिकता की बात करते हैं लेकिन चार्टर्ड प्लेन का पैसा कहां से आ रहा है.

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लेकिन मंगलवार शाम अहमदाबाद से लौटने के बाद एक फ़्लाइओवर का उद्घाटन समारोह में नीतीश कुमार पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय सांसद शत्रुघन सिन्हा को पूरे कार्यक्रम के दौरान नज़रअंदाज किया. जब मंच पर भाषण देने के समय नीतीश उठे तो सबको उमीद थी कि बिहारी बाबू का नाम लेना नहीं भूलेंगे. लेकिन उनकी तरफ़ देखा तो सही लेकिन, नाम लेने से बचते रहे. इस मंच पर उप मुख्य मंत्री सुशील मोदी और पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव भी उपस्थित थे.

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लेकिन जहां ये कार्यक्रम चल रहा था उस समय पटना के स्टेशन रोड की सबसे बड़ी मस्जिद से शाम का अजान शुरू हुआ लेकिन नीतीश ने अपना भाषण नहीं रोका. सबने यही कहा कि फ़िलहाल नीतीश भाजपा को नाराज़ नहीं करना चाहते. कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली के रामलीला मैदान में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा के मुद्दे पर रैली को जल्दी जल्दी दोपहर के अजान के मद्देनज़र ख़त्म कर दिया था.

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