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शेल्टर होम मामला: HC ने मंजू वर्मा की केस डायरी मांगी, ब्रजेश ठाकुर की जमानत पर सुनवाई टाली 

न्यायमूर्ति सुधीर सिंह ने वर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान तीन अक्तूबर तक केस डायरी पेश करने का आदेश दिया.

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शेल्टर होम मामला: HC ने मंजू वर्मा की केस डायरी मांगी, ब्रजेश ठाकुर की जमानत पर सुनवाई टाली 

प्रतीकात्मक चित्र

पटना:

पटना उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के संबंध में केस डायरी पेश करने का बिहार सरकार को बुधवार को निर्देश दिया. वर्मा के घर से हाल में सीबीआई की छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार मिले थे जिसके बाद उनके खिलाफ सशस्त्र अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. न्यायमूर्ति सुधीर सिंह ने वर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान तीन अक्तूबर तक केस डायरी पेश करने का आदेश दिया. वर्मा के पति के मुजफ्फरपुर आश्रय गृह सेक्स कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के साथ कथित संपर्क की रिपोर्टों के बाद पिछले महीने उन्हें सामाजिक कल्याण विभाग की मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

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इस बीच, अदालत ने ब्रजेश ठाकुर की जमानत याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी है, क्योंकि सीबीआई के वकील संजय कुमार ने अभिवेदन दिया था कि जांच एजेंसी को याचिका की प्रति नहीं दी गयी है. गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने शेल्टर होम मामले में सुनवाई करते हुए जेजे एक्ट की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े किए थे. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर जेजे एक्ट सही से लागू किया गया होता तो देवरिया और मुजफ्फरपुर जैसी घटनाएं नहीं होतीं. कोर्ट ने शेल्टर होम मे रहने वाले बच्चों की संख्या में आई तेजी से गिरावट पर भी चिंता जताई.

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कोर्ट ने कहा कि उनके पास भी दिल और आत्मा है. आखिर बच्चों की संख्या में इतनी कमी क्यों आई? क्या किसी ने कभी यह देखा ही नहीं कि बच्चे कहां लापता हो रहे हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी एक सुझाव दिया. कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए वह केंद्र और राज्य स्तर पर ऐसे शेल्टर होम की निगरानी के लिए एक कमिटी बनाए. वहीं इस मामले में शेल्टर होम से बच्चों की संख्या में आई कमी पर केंद्र सरकार ने कोर्ट में रिपोर्ट सौंपने की बात कही.

VIDEO: हॉरर होम का हुआ पर्दाफाश.

केंद्र सरकार ने कहा कि वह राज्यों से बात करके इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करेगी. हालांकि केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि सरकार द्वारा चलाये जा रहे चाइल्ड केयर इंस्टिट्यूशन में रहने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है. केंद्र सरकार ने कहा कि 2016 में ये संख्या 4 लाख थी जो घटकर 2 लाख हो गई है. केंद्र द्वारा दिए इन आंकड़ों पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आखिर ये बच्चे कहां चले गए? कोर्ट ने कहा कि यह संख्या एक चेतावनी की तरह है और अब समय आ गया है कि हमें सतर्क हो जाना चाहिए. (इनपुट भाषा से) 



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