आपने भाषा की मर्यादा कैसे खो दी? शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार से पूछा

अब राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने एक बयान में कहा है कि लगता है नीतीश जी अंदर से हिल गए हैं. आज अपनी पार्टी की बैठक में उनका भाषण तो यही बता रहा है.

आपने भाषा की मर्यादा कैसे खो दी? शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार से पूछा

राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी

पटना:

जनता दल यूनाइटेड (JDU) की राष्ट्रीय परिषद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने यूं तो अपने किसी सहयोगी दल के आलोचक या विरोधी दल के नेताओं का नाम नहीं लिया. लेकिन इस भाषण के बाद जहां केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने ट्वीट किया वहीं तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने भी कई सवाल किए.

अब राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी (Shivanand Tiwari) ने एक बयान में कहा है कि लगता है नीतीश जी अंदर से हिल गए हैं. आज अपनी पार्टी की बैठक में उनका भाषण तो यही बता रहा है. शिवानंद ने कहा कि 'परिष्कृत भाषा और शैली में शालीनता नीतीश कुमार की पूंजी रही है. वह पूंजी चुकती दिखाई दे रही है. आज के उनके भाषण में धमकी का स्वर सुनाई दे रहा था. निशाने पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी तो थे ही. अपने गठबंधन के उनलोगों को भी नीतीश जी ने निशाने पर लिया जो उनके नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं. तेजस्वी के आरोपों का जवाब उन्होंने नहीं दिया. बल्कि उपहास उड़ाते हुए कहा कि उनको राजनीति का ककहरा तक मालूम नहीं है. उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के बाद तेजस्वी का अता-पता नहीं चलेगा. इसको हम तेजस्वी की जीत के रूप में देखते हैं. लगता है तेजस्वी को सुशील मोदी और संजय सिंह की रोज़ाना गाली से नीतीश जी संतुष्ट नहीं हैं. इसलिए उन्होंने कमान अब अपने हाथ में ले ली है.'

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शिवानंद ने कहा कि 'लेकिन समय अब बदल गया है. जवाब मिलने में विलंब नहीं हुआ. दोनों ओर से जवाब मिला. तेजस्वी ने तो जवाब दिया ही. गिरिराज भी तैयार ही बैठे थे. सबसे आश्चर्य तो यह है कि नीतीश जी ने अपने के सी त्यागी को भी लपेटे में ले लिया. नीतीश जी ने अपनी राजनीति की एक नैतिक आभा बनाई थी. अपने सीमित जनाधार के साथ राजनीति की उनकी यह नैतिक आभा ही उनकी राजनीति का सबल आधार था. नीतीश जी की राष्ट्रीय छवि इसी वजह से बनी थी. लेकिन महागठबंधन से पाला बदल ने उनके उस नैतिक आभा को धुलधूसरित कर दिया. सरकार में भ्रष्टाचार की कहानियां हर पत्रकार के पास है. जनता बेदम है. सरकारी दफ़्तरों में सुनवाई नहीं है. राजनीतिक कार्यकर्ताओं को नीतीश जी ने सत्ता सभांलते ही दलाल घोषित कर दिया था. किसी की मत सुनिए का संदेश उन्होंने सरकारी तंत्र को दे दिया था. कुल मिलाकर नीतीश जी की राजनीति के समापन की घड़ी दिखाई देने लगी है. लगता है नीतीश जी भी उसको देख रहे हैं इसीलिए उनका आत्मनियंत्रण हिल गया लगता है.'

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