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'मानव तस्करी' का 'गढ़' बना बिहार, बीते 5 सालों में 1287 तस्कर गिरफ्तार

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'मानव तस्करी' का 'गढ़' बना बिहार, बीते 5 सालों में 1287 तस्कर गिरफ्तार

बिहार में हर महीने बड़ी संख्या में बच्चों को तस्करी के जरीए अपराध की दुनिया में धकेला जाता है (प्रतीकात्मक फोटो)

पटना: बिहार सरकार भले ही सुशासन का कितना भी दावा करे, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. यहां मानव का ही मोल नहीं है, तो विकास किस बात का. मानव के मोल की बात करें तो यहां सामान की तरह लोगों की खरीद-फरोख्त का धंधा जोरों पर हैं. ये बात खुद सरकार के आंकड़ें बता रहे हैं. बिहार में पिछले पांच सालों के दौरान 1742 लोगों का बचाया गया और मानव तस्करी के दोषी 1287 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

बिहार विधान परिषद में बीजेपी विधायक रजनीश कुमार द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने बताया कि जनवरी, 2011 से नवम्बर 2016 तक रेस्क्यु दल द्वारा कुल 1742 लोगों को बचाया गया जिनमें 1001 पुरुष एवं 741 महिलाएं थीं. मानव तस्करी के दोषी 1287 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस कार्य के लिए कुल 372 बचाव अभियान चलाए गए.

मंजू वर्मा ने बताया कि मानव तस्करी रोकने एवं पीडितों के पुनर्वास के लिए 12 दिसंबर, 2008 से पूरे राज्य में अस्तित्व नामक योजना चलाई जा रही है. उन्होंने अस्तित्व कार्य योजना के अनुपालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय मानव तस्करी विरोधी समन्वय समिति, महानिदेशक  की अध्यक्षता में मानव तस्करी विरोधी अभियोजन अनुश्रवण समिति गठित है और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय मानव तस्करी विरोधी समन्वय समिति राज्य के सभी 38 जिलों में गठित है.

उन्होंने बताया कि इन समितियों द्वारा समय-समय पर बैठक कर मानव तस्करी विरोधी कार्यो की समीक्षा कर कार्रवाई की जाती है. पुलिस उपाधीक्षक की अध्यक्षता में मानव तस्करी विरोधी इकाई सभी 44 पुलिस जिलों (रेल जिला सहित) में गठित है जिसके द्वारा छापामारी और बचाव का कार्य किया जा रहा है.

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बता दें कि साल 2014 में डीआईजी अजय मिश्रा ने मानव तस्करी पर आयोजित एक सेमिनार में कहा था कि बिहार से हर महीने करीब 4000 बच्चों को तस्करी के जरीए बाहर भेजा जाता है. उन्होंने कहा कि इन बच्चों को अपराध की दुनिया के साथ-साथ मजदूरी तथा सैक्स व्यापार में धकेला जाता है.

(इनपुट भाषा से भी)


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