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नीतीश अगर लालू का साथ छोड़ दें तो हम बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार : बिहार बीजेपी

लालू परिवार पर सीबीआई की छापेमारी के खबरों पर नीतीश कुमार चुप्पी साधे हुए हैं.

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नीतीश अगर लालू का साथ छोड़ दें तो हम बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार : बिहार बीजेपी

नीतीश कुमार मंगलवार को होने वाली पार्टी विधायकों की बैठक अपनी चुप्पी तोड़ सकते हैं...

खास बातें

  1. फिलहाल बिहार में महागठबंधन टूटने की संभावना बहुत कम
  2. राजद ने कहा - उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे
  3. नीतीश कुमार पार्टी विधायकों की बैठक में तोड़ सकते हैं चुप्पी
पटना:

बिहार में महागठबंधन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. हालांकि, लालू यादव और नीतीश कुमार वर्तमान हालात में दोनों के बीच आई दूरियां कम करने का भरसक प्रयास कर रहे हैं. इसी बीच, विपक्षी पार्टी भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नीतीश कुमार को समर्थन देने के लिए तैयार है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने मीडिया में बयान दिया है कि अगर नीतीश कुमार राजद से अपना नाता तोड़ लेते हैं तो बीजेपी उन्हें बाहर से समर्थन देगी. हालांकि उन्हें बाद में जोड़ दिया कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व का होगा. हालांकि, इसकी संभावना बहुत ही कम है कि बिहार में सत्ता में बदलाव के समीकरण देखने को मिले लेकिन संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.  
 
तमाम अटकलों के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने सोमवार को अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में विधायकों ने फैसला लिया कि लालू प्रसाद यादव के बेटे और राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने पद पर बरकरार रहेंगे और इस्तीफा नहीं देंगे.  

उधर, इस पूरे प्रकरण पर नीतीश कुमार चुप्पी साधे हुए हैं. लालू परिवार पर हुई छापेमारी के दौरान वह पटना में नहीं थे. बताया जा रहा है कि मंगलवार को नीतीश कुमार भी अपने विधायकों और सांसदों के साथ बैठक करने वाले हैं. माना जा रहा है कि वह बैठक के बाद अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं. आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता जगदानंद ने बताया, "नीतीश कुमार ने कल लालू से बात की थी. वह बीमार थे."  


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सूत्रों का कहना है कि इतना तो तय है कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार पर जरूर बोलेंगे. हो सकता है कि वह लालू या तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना इशारों-इशारों कुछ कहें. 11 जुलाई मंगलवार को अपने विधायकों की बैठक बुलाकार नीतीश कुमार 11 जुलाई को ही दिल्ली में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रत्याशी के चयन के लिए होने वाली 17 विपक्षी दलों की मीटिंग में शामिल नहीं होने की भूमिका तैयार कर ली है.
 
वो अलग बात है कि अप्रैल में नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए साझा उम्मीदवार खड़ा करने के लिए सबसे पहले पहल की थी और इसके लिए उन्होंने बकायादा दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की थी. बाद में उन्होंने अपने बयान से किनारा कर लिया. कल होने वाली बैठक में उसी असहज स्थिति से पुनरात्ति से बचने की कोशिश की गई है. विपक्ष उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार का नाम तय करने का प्रयास करेगा. नीतीश कुमार ने पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव को विपक्षी पार्टियों की होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए कहा है.

हालांकि, नीतीश कुमार कई बार गठबंधन धर्म से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं. उन्होंने नोटबंदी की भी तारीफ की थी. नोटबंदी की तारीफ करने वाले वह विपक्षी नेताओं की जमात में पहले शख्स थे.


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