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मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड: ब्रजेश ठाकुर क्या जेल से भी अपने खिलाफ जांच को प्रभावित कर रहा?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही इस बात को बार-बार कहते रहें कि उनकी सरकार न किसी को फंसाती है और न ही बचाती है, लेकिन उनका समाज कल्याण विभाग अभी भी ब्रजेश ठाकुर पर मेहरबान है.

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड: ब्रजेश ठाकुर क्या जेल से भी अपने खिलाफ जांच को प्रभावित कर रहा?

मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड का आरोपी ब्रजेश ठाकुर.

खास बातें

  1. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम का मुख्य आरोपी है ब्रजेश ठाकुर
  2. समाज कल्याण विभाग अब भी ब्रजेश ठाकुर पर मेहरबान
  3. 52 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज हुआ था मामल में
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही इस बात को बार-बार कहते रहें कि उनकी सरकार न किसी को फंसाती है और न ही बचाती है, लेकिन उनका समाज कल्याण विभाग अभी भी ब्रजेश ठाकुर पर मेहरबान है. ये किसी विपक्षी दल का आरोप नहीं बल्कि ख़ुद समाज कल्याण विभाग ने ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प विकास समिति द्वारा चलाये जा रहे स्वाधार गृह के मामले में साबित कर दिया है.

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स्वाधार गृह में 18 साल से ऊपर की बेघर या अनाथ महिलाओं को रोज़गार का प्रशिक्षण दिया जाता है. मार्च महीने में यहां जांच में ग्यारह महिलाओं को पाया गया था, हालांकि 27 महिलाओं का रेजिस्ट्रेशन था. लेकिन मई महीने के आखिर में जब ब्रजेश ठाकुर के द्वारा संचालित बालिका गृह से संबंधित प्राथमिकी और गिरफ़्तारी का सिलसिला शुरू हुआ तब इसकी जांच के आदेश ज़िला अधिकारी द्वारा दिए गए और 9 जून को जांच करने गई टीम को वो सेंटर बंद मिला.

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इसके बाद वहां के स्थानीय अधिकारियों ने 22 जून को समाज कल्याण विभाग से पत्र लिखकर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश मांगा, जो क़रीब एक महीने के बाद 20 जुलाई को दिया गया. लेकिन ये प्राथमिकी बाल संरक्षण विभाग के स्थानीय अधिकारी दिवेश शर्मा ने 30 जुलाई को दर्ज कराई.

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हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्राथमिकी का मतलब ये नहीं कि सभी महिलाओं को आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने ग़ायब कर दिया. ये हो सकता है कि चूकि वर्षों से इस केंद्र को चलाने के लिए उसे पैसे नहीं मिले थे तो उसने मार्च महीने में फर्जीवर किया हो, लेकिन 52 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज होना साबित करता है कि ब्रजेश ठाकुर के हाथ कितने लंबे हैं.


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