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क्या मोदी सरकार बिहार की बड़ी परियोजना से हाथ खींच रही है?

बिहार के छपरा जिले में मढ़ौरा में बन रही डीज़ल इंजन फ़ैक्टरी को शुरू होने के पहले बंद किए जाने के आसार हैं.

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क्या मोदी सरकार बिहार की बड़ी परियोजना से हाथ खींच रही है?

मोदी सरकार ने बांका के अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट को इस आधार पर ठंडे बस्तेमें दल दिया था...

खास बातें

  1. नीतीश कुमार केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से बात करना चाहते हैं
  2. छपरा के मढ़ौरा के डीज़ल इंजन फ़ैक्टरी प्रोजेक्ट को मोदी सरकार की 'न'
  3. लालू यादव ने रेल मंत्री कार्यकाल में की थी डीज़ल इंजन कारख़ाने की घोषणा
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से बात करना चाहते हैं और उन्हें अपने सुझाव भी देना चाहते हैं. दरअसल, नीतीश सोमवार को एक अख़बार में छपी उस ख़बर से परेशान हैं जिसमें रेलवे के सूत्रों से ये जानकारी दी गई है कि बिहार के छपरा जिले में मढ़ौरा में बन रही डीज़ल इंजन फ़ैक्टरी को शुरू होने के पहले बंद किया जाएगा. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकी रेलवे को पूरा विद्युतीकरण का भरोसा है, इसलिए डीज़ल इंजन की उन्हें ज़रूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि नीतीश इस दावे को नहीं मानते.

नीतीश के अनुसार रेलवे लाइन का पूर्ण विद्युतीकरण होने में अभी काफ़ी समय है इसलिए डीज़ल इंजन की खपत रेल्वे में होगी और अगर नए इंजन आएंगे तब पुरानों को बदला भी जा सकता है. नीतीश ने कहा कि अगर मन लिया जाए कि पूरे देश में विद्युतीकरण का काम पूरा भी हो जाए तो कई क्षेत्र ऐसे होंगे जहां इनकी मांग और खपत होगी.

पढ़ें: नीतीश कुमार का लालू पर तंज, कहा- पद धन अर्जन करने के लिए नहीं, बल्कि काम करने के लिए मिलता है

नीतीश ने रेल मंत्री से बात करने की बात कही है. कहा कि अगर ज़रूरत होगी तो उन्हें अपनी तरफ़ से इस मुद्दे पर सलाह भी देंगे. बिहार के मढ़ौरा में इस डीज़ल इंजन के कारख़ाने की घोषणा लालू यादव ने अपने रेल मंत्री कार्यकाल में किया था लेकिन इस पर काम केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद शुरू हुआ. ये फ़ैक्टरी जनरल इलेक्ट्रिक बना रहा है और हर वर्ष दस इंजन का निर्माण होगा और रेलवे अगले दस वर्षों में 100 इंजन ख़रीदने के प्रस्ताव पर समझौता कर चुका है. फ़िलहाल ये प्रोजेक्ट समय से पहले चल रहा है और निर्माण कार्य अगले वर्ष शुरू होने को उम्मीद है.

VIDEO : कैबिनेट विस्तार पर नीतीश कुमार की सफाई


इसके पूर्व भी केंद्र सरकार ने बांका में चार हज़ार मेगावाट के अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट को इस आधार पर ठंडे बस्तेमें दल दिया था कि पहले राज्य सरकार उत्पादित पावर ख़रीद के समझौते के काग़ज़ात लाए. राज्य सरकार का कहना है कि बांका का पावर प्लांट प्रधानमंत्री के बिहार पैकेज का हिस्सा है और केंद्र इससे पीछे कैसे हट सकती है? लेकिन बांका के बाद अगर मढ़ौरा का प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में चला गया तब बिहार ही नहीं नीतीश के नेतृत्व वाली सरकार के किए एक बड़ा झटका होगा.


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