क्या नीतीश कुमार अब 'सुशासन बाबू' की छवि खोते जा रहे हैं?

जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार को अब इस बात की परवाह नहीं कि मीडिया में क्या छप रहा और उनकी कितनी आलोचना हो रही क्योंकि उन्हें मालूम हैं कि जब तक भाजपा के साथ गठबंधन है तब तक सरकार पर अलग-अलग घटनाओं से कोई असर नहीं पड़ता.

क्या नीतीश कुमार अब 'सुशासन बाबू' की छवि खोते जा रहे हैं?

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

पटना:

बिहार में पिछले कुछ दिनों में एक के बाद एक ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनसे लगता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अब शासन और प्रशासन पर नियंत्रण नहीं रहा. अधिकांश मामलों में जिन विभागों से संबंधित घटनाएं हुई हैं वो मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले गृह या जेल विभाग की घटनाएं हैं. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पहले किसी घटना के बाद की कार्रवाई से नीतीश कुमार अपने प्रशासन की धाक दिखाते थे लेकिन अब वो तत्परता और इच्छाशक्ति इन घटनाओं के बाद उनकी प्रतिक्रिया में नहीं दिखती.

पिछले 48 घंटे के दौरान दो अलग-अलग घटनाएं हुईं. एक तो मुख्यमंत्री के गृह ज़िले नालंदा में ही हुई जहां उनकी पार्टी के विधायक जितेंद्र कुमार शनिवार को बिहारशरीफ सदर अस्पताल पहुंचे. एक पार्टी कार्यकर्ता की मौत के बाद अपने मनमुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट न मिलने पर गाली-गलौज की और धमकी दी जिसकी प्रतिक्रिया में वहां के डॉक्‍टर हड़ताल पर चले गये. निश्चित रूप से जितेंद्र कुमार द्वारा जो कुछ भी किया गया वो राजद शासन काल की याद दिलाता है. लेकिन नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी का विधायक होने के कारण इस दुर्व्यवहार पर कोई कार्रवाई नहीं की.

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शनिवार को ही सीतामढ़ी जेल का एक वीडियो वायरल हुआ जहां एक क़ैदी पिंटू तिवारी जो दो इंजीनियरों की हत्या में सज़ायाफता है, उसने जेल में अपना जन्‍मदिन मनाया. जेल में जन्मदिन मनाने की किसी को रोक नहीं. लेकिन इसका मोबाइल पर रिकॉर्डिंग हुआ और जब भोज हुआ तो उसमें कई क़ैदी आराम से फ़ोन पर बात करते दिख रहे हैं. जेल विभाग के मुखिया नीतीश कुमार ख़ुद हैं और बिहार में एक भी जेल में जैमर नहीं है, तो शायद इसके लिए उनसे अधिक कोई और व्यक्ति दोषी नहीं हो सकता. लेकिन इस घटना के बाद जेल के कुछ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. लेकिन सचाई यही है कि अपराधी जेल से नीतीश राज में भी समानांतर शासन चलाते हैं और उनके स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं होता.

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इससे भी ज़्यादा शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना राज्य के गोपालगंज में घटी जहां घूस में 15 लाख नहीं देने पर एक ठेकेदार रमाशंकर सिंह को ज़िंदा जला दिया गया. हालांकि पुलिस इस मामले की जांच हत्या और आत्महत्या दोनों एंगल से कर रही है लेकिन पुलिस आज तक आरोपी जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह या उनकी पत्नी को गिरफ़्तार नहीं कर पाई है. घूस न देने पर अधिकारियों द्वारा किसी ठेकेदार को ज़िंदा जला देने की शायद बिहार की यह पहली घटना है. लेकिन यह दिखाता है कि बिना घूस के बिहार में कोई अधिकारी काम नहीं करता है भले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति की दुहाई देते रहे. हालांकि मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अपने तमाम दावों को उसी समय खोखला साबित कर दिया था जब लोकसभा चुनावों के बीच में बिहार के आर्थिक अनुसंधान इकाई की जांच झेल रहे IPS अधिकारी विवेक कुमार, जिनके ऊपर शराब माफ़ियाओं से भी साठगांठ का आरोप है, नीतीश कुमार ने उनका निलंबन ख़त्म कर उनकी आनन फ़ानन में नए पद पर पोस्टिंग की. ख़ुद नीतीश कुमार शराबबंदी पर कभी ना समझौता करने का दावा करते हैं लेकिन लोकसभा चुनाव में गया की एक सभा में बिंदी यादव को अपने बग़ल में बैठाने से उन्होंने परहेज़ नहीं किया. बिंदी यादव क्या हैं और शराबबंदी के बावजूद उनके घर से शराब कांड हुआ ये किसी से छिपा नहीं.

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जिस पुलिस विभाग के नीतीश कुमार मुखिया हैं उसकी पोल सुपौल में पिछले दिनों उस समय खुली जब पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा की अंत्येष्टि में एक भी बंदूक़ से फ़ायरिंग नहीं हुई क्योंकि गोलियां एक्‍सपायर्ड थी. इसका वीडियो देश और विदेश में वायरल हुआ. जांच के आदेश हुए लेकिन कार्रवाई के नाम पर आज तक कुछ नहीं हुआ.

इससे पहले 10 दिन पहले बिहार के छपरा में एक दारोग़ा और जवान की हत्या कर दी गई और इस हत्या में इस्तेमाल किया गया पिस्टल जिला परिषद अध्यक्ष मीना अरुण का था. इस हत्याकांड में मीना अरुण के कई सारे संबंधी आरोपित हैं. मीना अरुण की भी कई तस्वीरें विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जारी की.

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जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार को अब इस बात की परवाह नहीं कि मीडिया में क्या छप रहा और उनकी कितनी आलोचना हो रही क्योंकि उन्हें मालूम हैं कि जब तक भाजपा के साथ गठबंधन है तब तक सरकार पर अलग-अलग घटनाओं से कोई असर नहीं पड़ता. उन्हें इस बात का भी अंदाज़ा है कि मीडिया के भाजपा विरोधी वर्ग के लिए वो खलनायक हैं तो भाजपा समर्थित मीडिया भी उन्हें हर घटना के बाद हीरो से ज़ीरो बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता. लेकिन नीतीश के पार्टी के लोगों का मानना है कि अब धीरे धीरे उनका इक़बाल कम हो रहा है इसलिए घटनाओं में वृद्धि हो रही हैं.

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