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क्या नीतीश कुमार सहयोगी भाजपा को आइना दिखाने का काम कर रहे हैं?

सामाजिक तनाव के मुद्दे पर नीतीश ने अपने मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने मोतिहारी में करने से परहेज़ नहीं किया.

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क्या नीतीश कुमार सहयोगी भाजपा को आइना दिखाने का काम कर रहे हैं?

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर करवाने में चूक नहीं की
  2. बच्चियों को अत्याचार से बचाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ाना होगा
  3. भाजपा के समर्थन के बावजूद दंगा फ़साद बर्दाश्‍त नहीं करेंगे
पटना: बिहार में पिछले कुछ महीनों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के बीच तनाव की ख़बरें आ रही हैं. ख़ासकर पिछले एक महीने के दौरान कुछ मुद्दों पर ये मतभेद जगज़ाहिर हुए हैं. लेकिन लगता है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शांत भाव से बिना ज़्यादा शोर किये भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और बिहार भाजपा के उन नेताओं को, जो अपने बयानों से सरकार की फ़ज़ीहत करते हैं, उन्हें आइना दिखाने का काम कर रहे हैं. इस बात का आधार हैं तीन ज्वलंत मुद्दे - सामाजिक तनाव, दलित का मुद्दा और बच्चियों का मामला - जिनपर भाजपा पूरे देश में आलोचना का शिकार हो रही है, उनपर नीतीश का अपना निर्णय.

जहां सामाजिक तनाव के मुद्दे पर नीतीश ने अपने मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने मोतिहारी में करने से परहेज़ नहीं किया. वहीं दलित मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा को जल्द कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने के अलावा अपनी छवि सुधारने की नसीहत दी. इसके अलावा पूरे देश में बलात्कार का मामला एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. तब उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना की शुरुआत कर डाली जिसके तहत जन्म से ग्रेजुएशन करने तक बिहार में लड़कियों को क़रीब 60 हज़ार रुपये मिलेंगे. नीतीश का अंदाज और संदेश साफ़ है कि आपको बच्चियों को अत्याचार से बचाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ाना होगा.

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उसी तरह सामाजिक सद्भाव के मुद्दे पर नीतीश ने जैसे भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर करवाने में चूक नहीं की, उसका भाजपा नेताओं में नाराज़गी के बाद एक ही विश्‍लेषण हुआ कि नीतीश भले भाजपा के समर्थन से सरकार चला रहे हों, लेकिन दंगा फ़साद बर्दाश्‍त नहीं करेंगे.

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दलितों के मुद्दे पर असंतोष को कम करने के लिए उन्होंने दलित-महादलित के अंतर को ख़त्म करते हुए सभी जातियों को इसका लाभ देने की घोषणा की, उससे साफ़ था कि वह कोई आंदोलन बिहार की धरती पर फैलने नहीं देना चाहते. इसके अलावा उन्होंने रामविलास पासवान से अपने नज़दीकी संबंधों का लाभ उठाते हुए जैसे राज्य में सभी अंबेडकर छात्रावास में सस्ते दर पर अनाज सुनिश्चि‍त करवाया, उससे साफ़ है कि फ़िलहाल वो भाजपा के एजेंडा पर चलने की बजाय ख़ुद के रास्ते और अपने मन मिज़ाज से चलना राजनीतिक रूप से ज़्यादा बेहतर समझते हैं.

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