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क्या सीबीआई मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले को गंभीरता से नहीं ले रही?

दिल्ली के साकेत स्थित कोर्ट ने बहस करने के लिए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति पर जांच एजेंसी को फटकार लगाई

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क्या सीबीआई मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले को गंभीरता से नहीं ले रही?

मुजफ्फरपुर के बालिका गृह भवन ( शेल्टर होम) केस का मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर.

पटना:

सर्वोच्च न्यायालय की तमाम फटकार के बावजूद यह नहीं लगता कि जांच एजेंसी सीबीआई इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही. खुद इस मामले की सुनवाई कर रहे दिल्ली के साकेत स्थित कोर्ट ने बहस करने के लिए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति पर जांच एजेंसी को फटकार लगाई है.

कोर्ट ने अगले दो दिन की मोहलत देते हुए कहा है कि अगर वकील की नियुक्ति नहीं होती है तो सर्वोच्च न्यायालय को इस सम्बंध में सूचना देनी होगी. हालांकि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने सीबीआई निदेशक को कोर्ट के आदेश की प्रति भी उपलब्ध कराने को कहा है. इस सम्बंध में जांच एजेंसी ने एक हफ़्ते का समय मांगा था जिसे कोर्ट ने नामंज़ूर कर दिया.

बिहार में इस मामले में गवाहों की सुरक्षा और राज्य सरकार के रुख को आधार बनाकर सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का ट्रायल दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में करने का आदेश पारित किया था.


VIDEO : शेल्टर होम से लड़कियां गायब

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पिछले शनिवार को बिहार के मोकामा से सात लड़कियां फरार हो गई थीं जिनमें से परिवार वालों की मदद से छह लड़कियों को पुलिस ने दरभंगा से बरामद किया था. इनमें से तीन इस मामले से जुड़ी हैं जो कि अहम खबर है. लेकिन सातवीं लड़की के न मिलने के कारण राज्य की पुलिस की जमकर आलोचना हो रही है.


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