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क्या नीतीश कुमार को घेरने के लिए गिरिराज सिंह और तेजस्वी यादव में अलिखित समझौता है?

इसकी एक झलक जहां शुक्रवार को देखने को मिली जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी की बैठक में जहां गिरिराज सिंह का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग गठबंधन में खचपच करने में लगे हैं उनको विधानसभा चुनाव के बाद जवाब मिलेगा.

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क्या नीतीश कुमार को घेरने के लिए गिरिराज सिंह और तेजस्वी यादव में अलिखित समझौता है?

गिरिराज सिंह और तेजस्‍वी यादव नीतीश कुमार पर अक्‍सर निशाना साधते रहते हैं

खास बातें

  1. 'महादेव की दया से जो मुझे सही लगता बोलता हूं'
  2. तेजस्‍वी यादव कर रहे गिरिराज सिंह की तारीफ
  3. तेजस्‍वी की नीतीश को चुनाव लड़ने की चुनौती
पटना:

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को घेरने और हर दिन उनकी आलोचना करने वालों की सूची में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) का नाम भी शामिल हो गया है. दोनों ही नेता नियमित रूप से अपने बयानों के माध्यम से नीतीश कुमार को घेरने की योजना में साथ दिखते हैं.

इसकी एक झलक जहां शुक्रवार को देखने को मिली जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी की बैठक में जहां गिरिराज सिंह का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग गठबंधन में खचपच करने में लगे हैं उनको विधानसभा चुनाव के बाद जवाब मिलेगा और साथ ही यह भीकहा कि कुछ लोग मेरे ख़िलाफ़ बयान देते हैं और जब मिलते हैं तो कहते हैं कि छपने के लिए ऐसा करते हैं. इस पर गिरिराज ने ट्वीट कर तुरंत अपना जवाब दिया.

उन्‍होंने ट्वीट करते हुए कहा, 'महादेव की दया से जो मुझे सही लगता बोलता हूं, ना किसी के आगे बोलता ना पीछे बोलता हूं और जो बोलता हूं उस पर अडिग रहता हूं.'


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वहीं तेजस्वी यादव पर उन्होंने कहा था कि जिन्हें राजनीति का क ख ग नहीं आता वो केवल बयानबाज़ी करते रहते हैं. तब तेजस्वी यादव ने कहा कि तब उन्हें उप मुख्यमंत्री क्यों बनाया. तेजस्वी ने शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर अपने विकास पर इतना भरोसा है तो अकेले चुनाव क्यों नहीं लड़ लेते. फिर तेजस्वी ने गिरिराज सिंह की तरफ़दारी करते हुए नीतीश कुमार से पूछा कि जिन ख़च बज करने वालों को वो चुनाव बाद कार्रवाई करने की चेतावनी दे रहे हैं तो चुनाव से पूर्व हिम्मत है तो कार्रवाई क्‍यों नहीं कर लेते?

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वहीं शनिवार को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बेगूसराय में आए सूखे और बाढ़ के बहाने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फिर घेरने की कोशिश की और अपने ज़िले की स्थिति को लेकर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि जब बेगूसराय में बारिश नालंदा से कम हुई है तब नालंदा कैसे सूखाग्रस्त घोषित हो गया और बेगूसराय को कैसे छोड़ दिया गया. गिरिराज के तेवर से साफ़ है कि वर्षा या सूखा एक बहाना है, उन्हें बस नीतीश कुमार को अपनी आलोचना के केंद्र में रखना है. जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेताओं ने गिरिराज के बयान पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है.

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लेकिन भाजपा के नेता भी मानते हैं कि जिस प्रकार से गिरिराज और तेजस्वी एक दूसरे से बयानो में सुर ताल मिला रहे हैं उससे राजनीतिक लाभ आख़िरकार नीतीश कुमार को ही होगा. नीतीश कुमार को अगर यादव और भूमिहार जाति के नेता मिलकर या अलग-अलग निशाने पर रखते हैं तो नीतीश के परंपरागत वोटर ख़ासकर ग़ैर यादव, पिछड़ा, अति पिछड़ा और महादलित और अधिक लामबंद होते हैं जिसकी मिसाल 2010 में देखने को मिली. तब एक तरफ़ लालू यादव और रामविलास पासवान उन्हें चुनौती दे रहे थे वहीं दूसरी तरफ़ उनकी अपनी ही पार्टी में विरोधी ललन सिंह ने लिखित रूप से कांग्रेस पार्टी के प्रचार की कमान संभाली हुई थी और वह भी बोलने में सारी मर्यादाओं को भूलकर नीतीश कुमार पर हमला करते थे. लेकिन चुनाव परिणाम जब आया तो पहली बार बिहार के इतिहास में NDA को 243 में से 206 सीटें मिलीं.

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