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'जागो गांव' NGO ने अल्जाइमर और डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए रिहैबिलिटेशन सेंटर खोला

अंतरराष्ट्रीय अल्जाइमर दिवस के अवसर पर 'जागो गांव' एनजीओ ने अल्जाइमर और डिमेंशिया रिहैबिलिटेशन सेंटर का उद्घाटन किया.

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'जागो गांव' NGO ने अल्जाइमर और डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए रिहैबिलिटेशन सेंटर खोला

'जागो गांव' एनजीओ ने अल्जाइमर और डिमेंशिया रिहैबिलिटेशन सेंटर का उद्घाटन किया.

बेगूसराय (बिहार):

अंतरराष्ट्रीय अल्जाइमर दिवस के अवसर पर 'जागो गांव' एनजीओ ने अल्जाइमर और डिमेंशिया रिहैबिलिटेशन सेंटर का उद्घाटन किया. इस सेंटर में अल्जाइमर और डिमेंशिया से ग्रसित लोगों का इलाज होगा. जैसे-जैसे हम उम्रदराज होते हैं, हमारे मस्तिष्क में भी बदलाव होते हैं, और हमें कई बातों को याद करने में समस्याएं आ सकती हैं. लेकिन अल्जाइमर रोग और अन्य प्रकार के डिमेंशिया में स्मृतिलोप तथा अन्य लक्षण उत्पन्न होते हैं जो जीवन में कठिनाई पैदा करने के लिए पर्याप्त रूप से गंभीर होते हैं. ये लक्षण उम्रदराज होने के नैसर्गिक लक्षण नहीं होते हैं.

इस अवसर पर डॉक्टर रंजीत, डॉक्टर प्रभात कुमार, डॉक्टर गुंजन और संस्था के निदेशक ने अपने विचार रखे. डॉक्टर रंजीत ने कहां कि अल्जाइमर रोग सबसे आम प्रकार का डिमेंशिया है, जो मस्तिष्क के यथोचित रूप में काम न कर पाने की स्थिति में होने वाली परिस्थितियों के लिए समग्रता में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. अल्जाइमर याद्दाश्त, सोचने और व्यवहार संबंधी समस्याएं पैदा करता है. शुरुआती चरण में डिमेंशिया के लक्षण बहुत ही कम हो सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे रोग मस्तिष्क को अधिक नुकसान पहुंचाता है, लक्षण बिगड़ने लगते हैं. रोग के बढ़ने की दर हरेक व्यक्ति में अलग होती है.

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डॉक्टर प्रभात ने कहां कि मस्तिष्क के एक हिस्से हिप्पोकैंपस, जिसका संबंध सीखने से होता है, में मस्तिष्क कोशिकाएं, अक्सर अल्ज़ाइमर द्वारा सबसे पहले क्षतिग्रस्त होती हैं. स्मृतिलोप की यही वजह होती है, विशेषतौर पर हाल ही में जानी गई जानकारियों को याद करने में कठिनाई, अक्सर रोग का शुरुआती लक्षण होती है. डॉक्टर गुंजन ने कहां कि फिजियोथेरेपी द्वारा डिमेंशिया के लक्षणों का इलाज किया जा सकता है. 


संस्था के निदेशक सोमेश कुमार चौधरी ने कहां कि 'जागो गांव' एक राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था है, जिसका निबंधन 2010 में सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत नई दिल्ली में करवाया गया. संस्था एक समतामूलक समाज का सपना देखती हैं और स्वस्थ भारत की परिकल्पना करती है. अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ग्रामीण भारत में सतत प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि बिहार का पहला (संस्था के जानकारी के मुताबिक) अल्जाइमर और डिमेंशिया से ग्रसित लोगों के इलाज के लिए यह सेंटर खोला है, जिसका संचालन डॉ. रंजीत कुमार और डॉक्टर गुंजन कुमारी करेंगे. इस अवसर पर समाजसेवी आनंद कुमार ने विशेष भूमिका निभाई.


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