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दलितों को निजी क्षेत्र में भी मिले आरक्षण : जेडीयू नेता श्याम रजक

श्याम ने दलित समुदाय के युवा वर्ग को लिखे पत्र में कहा है कि आज़ादी से लेकर अब तक चले आ रहे राजनीतिक व्यवस्था के कारण अभी भी दलित याचक की भूमिका में हैं.

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दलितों को निजी क्षेत्र में भी मिले आरक्षण : जेडीयू नेता श्याम रजक

श्याम रजक ( फाइल फोटो )

पटना: बिहार में जनता दल यूनाइटेड के पूर्व मंत्री और पार्टी महासचिव श्याम रज़क अब दलितों के हित की बात करेंगे. श्याम ने दलित समुदाय के युवा वर्ग को लिखे पत्र में कहा है कि आज़ादी से लेकर अब तक चले आ रहे राजनीतिक व्यवस्था के कारण अभी भी दलित याचक की भूमिका में हैं. श्याम रजक ने कहा है कि यह देश के तथाकथित विकास के खोखलेपन का द्योतक है. आज नए भारत के निर्माण की बात की जा रही है. अंतराष्ट्रीय स्तर पर नायक बनने का हम सपना संजो रहे हैं. कुछ अर्थशास्त्रियों ने तो भविष्यवाणी कर दी है कि आने वाले दिनों में भारत विश्व की आर्थिक शक्ति बन जायेगा. परंतु दलितों के उत्थान एवं भागीदारी के बिना क्या भारत पूर्ण रूप से विकसित हो पायेगा? जब तक हम अपने देश में ही सभी वर्गों का विकास नहीं कर पाते, तब तक ये बात बेमानी होगी.

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श्याम के अनुसार कहने को तो दलितों को आरक्षण प्रदान किया जाता है, लेकिन क्या सिर्फ आरक्षण से दलितों का उत्थान हो जाएगा? न्यायपालिका में आरक्षण की मांग दोहराते हुए श्याम ने कहा कि एक लंबे अरसे से न्यायपालिका में आरक्षण की मांग हम लोगों द्वारा की जा रही है लेकिन कोई भी राजनीतिक दल हमारे इस मांग को तवज़्ज़ो नहीं दे रहा है. दलितों में प्रतिभा की कमी नहीं है. गुण, बुद्धि, विवेक के मामले में हम किसी से भी कम नहीं हैं. अगर दलितों को न्यायपालिका के लिए अक्षम समझा जाता है तो फिर न्यायपालिका सेवा आयोग का गठन कर के सभी को समान अवसर क्यों नहीं प्रदान किया जा रहा है ?

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आपको बता दें कि श्याम रजक जनता दल में 2015 से अलग-थलग पड़े हैं. कैथ 5 सालों तक नीतीश मंत्रिमंडल में मंत्री रहने के बाद इन दिनों श्याम के सितारे गर्दिश में बताए जा रहे हैं और माना जा रहा हैं इस पत्र के माध्यम से वो एक बार फिर दलितों के बीच अपनी पैर ज़माने की कोशिश करे रहे हैं. श्याम ने इसके अलावा कहा कि आज अधिकांश लोगों को निज़ी क्षेत्र की नौकरियों पर ही आश्रित रहना पड़ता है. संविदा पर नियुक्ति तथा निज़ी क्षेत्र की नौकरियों में भी हमारे लिए आरक्षण जरूरी है. इस विषय पर भी संसद में कानून बनाकर दलितों को न्याय दिया जाना चाहिए. साथ ही पदोन्नति में आरक्षण का मामला भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. कुछ शक्तियां पदोन्नति में आरक्षण ख़त्म करने में लगी हैं. इसके लिए हमें एकजूट होने की आवश्यकता है. यह हमारी एकजूटता में कमी का ही परिणाम है. 

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श्याम रजक ने पहली बार दलितों के बीच आर्थिक आधार पर वर्गीकरण का भी सार्वजनिक रूप से विरोध किया और कहा हम दलितों को राज्य के स्तर पर भी बांटा जा रहा है. किसी जाति को एक राज्य में आरक्षण है, तो दुसरे में नहीं. इस मुद्दे पर भी हमें एकजूट होना होगा. हम दलितों का दर्द कोई दूसरा वर्ग नहीं समझ सकता.


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