NPR-NRC का मुद्दा क्या नीतीश कुमार के लिए 'एक ओर कुआं तो दूसरी ओर खाईं' वाला बन गया है?

बिहार में जनता दल यूनाइटेड  के नेता प्रशांत किशोर के रविवार के उस ट्वीट के बाद कि नीतीश कुमार न नागरिक क़ानून और न एनपीआर-एनआरसी लागू करेंगे.

NPR-NRC का मुद्दा क्या नीतीश कुमार के लिए 'एक ओर कुआं तो दूसरी ओर खाईं' वाला बन गया है?

खास बातें

  • NPR के मुद्दे पर जेडीयू में मतभेद
  • प्रशांत किशोर खिलाफ
  • आरसीपी सिंह ने कहा कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं
पटना:

बिहार में जनता दल यूनाइटेड  के नेता प्रशांत किशोर के रविवार के उस ट्वीट के बाद कि नीतीश कुमार न नागरिक क़ानून और न एनपीआर-एनआरसी लागू करेंगे, सतारूढ़ एनडीए के घटक दलों में खलबली मची है. अधिकांश नेताओं का कहना हैं कि प्रशांत किशोर कुछ ज़्यादा बढ़चढ़ कर नीतीश कुमार से सम्बंधित दावा कर रहे हैं.  इसका एक उदाहरण रविवार को ही एक बार फिर देखने को मिल गया जब पार्टी के एक कार्यक्रम में राज्यसभा में संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने फिर कहा कि नये नागरिकता क़ानून और एनआरसी पर कुछ लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. जब तक नीतीश कुमार हैं किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा. हालांकि इस बार बीजेपी के किसी नेता ने बयान नहीं दिया लेकिन सवाल है जब एनपीआर कराने की अधिसूचना जारी हो चुकी है तब क्या नीतीश कुमार वापस एक क़दम जाएंगे?

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बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड के एक बड़े तबके के नेताओं का कहना है कि नीतीश फ़िलहाल चुनावी वर्ष में कोई अनायास विवाद शुरू करने से बचेंगे. इन नेताओं का कहना है कि ऐसा नहीं है कि प्रशांत किशोर ही इन मुद्दों की बारीकियों से समझते हैं लेकिन नीतीश कुमार जिन्होंने अगली सरकार फिर बीजेपी के साथ बनाने की ठानी है वो ऐसा कोई क़दम उठाएंगे जिससे कार्यकर्ताओं और वोटर में भ्रम की स्थिति बने. इन नेताओं का कहना हैं कि ये भी सच है कि नीतीश कुमार भलीभांति इस बात से परिचित हैं कि बीजेपी का मक़सद पाकिस्तान , बंगलादेश और अफगनिस्तान के हिंदू अल्पसंख्यक से ज़्यादा देश के मुस्लिम समाज को हाशिये पर रखना है. लेकिन गठबंधन की मजबूरी के सामने विवशता होती है इसलिए नीतीश कुमार एनआरसी का विरोध तो करेंगे लेकिन एनपीआर का केरल या पश्चिम बंगाल की तरह नहीं कराने का कोई घोषणा से निश्चित रूप से बचेंगे. लेकिन एक ओर सवाल नीतीश कुमार की धर्मनिरपेक्ष छवि को लेकर भी है. माना जा रहा है नीतीश के लिए यह मुद्दा 'एक ओर कुआं ओर खाईं' वाले जैसा बन गया है.

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जनता दल यूनाइटेड के नेताओं का कहना है कि बीजेपी के साथ सम्बंध बहुत मधुर नहीं हैं ये किसी से छिपा नहीं है लेकिन आरजेडी की तुलना में बिहार भाजपा के साथ सरकार चलाने में जो कम्फ़र्ट हैं उससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है. फ़िलहाल अब सबको इंतज़ार अगले हफ़्ते होने वाले जनता दल  यूनाइटेड के राजगीर सम्मेलन का. जहां उम्मीद की जा रही है कि नीतीश कुमार इन सभी मुद्दों पर अपनी पार्टी की राय सबके सामने रखेंगे. 

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