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जदयू सांसद महेंद्र प्रसाद की बढ़ सकती है मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर बताया अपना पति

महिला ने दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें कम से कम चार सप्ताह महेंद्र प्रसाद से अलग रहने का आदेश दिया गया था.

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जदयू सांसद महेंद्र प्रसाद की बढ़ सकती है मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर बताया अपना पति

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सांसद महेंद्र प्रसाद की मुश्किलें बढ़ सकती है. दरअसल, उनके खिलाफ एक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. महिला ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि महेंद्र प्रसाद उनके पति हैं और वह चाहती हैं कि कोर्ट की इजाज के बाद वह उनके साथ रहें. महिला ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें कम से कम चार सप्ताह महेंद्र प्रसाद से अलग रहने का आदेश दिया गया था. देश के सबसे रईस सांसदों में शामिल किंग महेन्द्र के ‘परित्याग किये गये' पुत्र ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें दावा किया गया था कि उनके पिता ने उनकी मां, जो प्रसाद की असली पत्नी है, को गैरकानूनी तरीके से बंद कर रखा है.

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हाईकोर्ट ने महिला को आरोपों की जांच पूरी होने तक प्रसाद से दूर रहने का आदेश दिया था. बता दें कि प्रसाद की दवा की अनेक कंपनियां और दूसरे कारोबार हैं. आरोप कि इस महिला ने सांसद की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी को गैरकानूनी तरीके से बंद कर रखा है. न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश राय की पीठ के समक्ष मंगलवार को यह मामला सुनवाई के लिये आया तो महिला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय ने पूरी तरह गैरकानूनी प्रक्रिया का पालन किया है.

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उन्होंने कहा कि सांसद भी उसके साथ ही रहना चाहते हैं. रोहतगी ने इस महिला के प्रसाद की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी होने का दावा करते हुये कहा कि पति और पत्नी को अलग अलग क्यों रहना चाहिए? देश में लोकतंत्र है. इसे विचित्र मामला बताते हुए उन्होंने इस मामले में हो रही जांच पर सवाल उठाया और कहा कि उच्च न्यायालय को इस तरह का आदेश नहीं देना चाहिए था क्योंकि वह सांसद के पुत्र द्वारा दायर बंदीप्रत्यक्षीकरण मामले की सुनवाई कर रहा है. इस पर पीठ ने कहा कि आप (याचिकाकर्ता) निश्चित ही लंबे समय से पति पत्नी की तरह रह रहे हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं हुआ कि आप पति पत्नी हैं.

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पीठ ने इस समय मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और कहा कि महिला आवश्यकता पड़ने या फिर स्पष्टीकरण के लिये उच्च न्यायालय जा सकती है. रोहतगी ने पीठ से कहा कि कुल मिलाकर उच्च न्यायालय का आदेश है कि पति पत्नी को अलग रहना चाहिए. हालांकि, पीठ ने टिप्पणी की कि पुलिस द्वारा इस मामले में उच्च न्यायालय में दाखिल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार दूसरी महिला (परित्याग किये गये पुत्र की मां) कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है.

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याचिकाकर्ता का बयान भी दर्ज किया गया है. उच्च न्यायालय के आदेश पर सवाल उठाते हुये रोहतगी ने कहा कि किसी प्राथमिकी के बगैर ही जांच कैसे हो सकती है. उन्होंने दावा किया कि प्रसाद ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले अपने पुत्र का परित्याग कर दिया था और यह सांसद की संपत्ति हड़पने की उसकी चाल है. उन्होंने कहा कि प्रसाद अस्वस्थ हैं और इसलिए जरूरी है कि उन्हें शीर्ष अदालत पहुंची याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहिए.



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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