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सुनो छोटे भाई नीतीश, तुम अब कीचड़ वाले फूल में तीर घोंपो या छुपाओ, तुम्हारी मर्ज़ी: लालू यादव

लोकसभा चुनाव 2019 में आखिरी चरण के चुनाव से पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने फेसबुक पोस्ट के जरिए नीतीश कुमार पर हमला बोला है.

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सुनो छोटे भाई नीतीश, तुम अब कीचड़ वाले फूल में तीर घोंपो या छुपाओ, तुम्हारी मर्ज़ी: लालू यादव

लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)

पटना:

लोकसभा चुनाव 2019 में आखिरी चरण के चुनाव से पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने फेसबुक पोस्ट के जरिए नीतीश कुमार पर हमला बोला है. चारा घोटाले में जेल में बंद लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार के नाम से एक फेसबुक पोस्ट लिखा है और उसमें उन्हें जनता की पीठ में छुरा घोंपने वाला बताया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कहा कि तीर का जमाना लद गया है. पढ़ें लालू यादव ने फेसबुक पर नीतीश कुमार के नाम से क्या लिखा है.

'सुनो छोटे भाई नीतीश,

लालटेन प्रकाश और रोशनी का पर्याय है. मोहब्बत और भाईचारे का प्रतीक है. हमने लालटेन के प्रकाश से ग़ैरबराबरी, नफ़रत, अत्याचार और अन्याय का अंधेरा दूर भगाया है और भगाते रहेंगे. तुम्हारा चिह्न तीर तो हिंसा फैलाने वाला हथियार है. मारकाट व हिंसा का पर्याय और प्रतीक है.

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और हां जनता को लालटेन की ज़रूरत हर परिस्थिति में होती है. प्रकाश तो दिए का भी होता है. लालटेन का भी होता है और बल्ब का भी होता है. बल्ब की रोशनी से तुम बेरोज़गारी, उत्पीड़न, घृणा, अत्याचार, अन्याय और असमानता का अंधेरा नहीं हटा सकते इसके लिए प्रेम से दिल और दिमाग़ का दिया जलाना होता है. समानता, शांति, प्रेम और न्याय दिलाने के लिए ख़ुद को दिया और बाती बनना पड़ता है. समझौतों को दरकिनार कर जातिवादी, मनुवादी और नफ़रती आंधियों से उलझते व जूझते हुए ख़ुद को निरंतर जलाए रहना पड़ता है. तुम क्या जानों इन सब वैचारिक और सैद्धांतिक उसूलों को. शॉर्टकट ढूंढना और अवसर देख समझौते करना तुम्हारी बहुत पुरानी आदत रही है.


और हां तुम कहां मिसाइल के ज़माने में तीर-तीर किए जा रहे हो? तीर का ज़माना अब लद गया. तीर अब संग्रहालय में ही दिखेगा. लालटेन तो हर जगह जलता मिलेगा और पहले से अधिक जलता हुआ मिलेगा क्योंकि 11 करोड़ ग़रीब जनता की पीठ में तुमने विश्वासघाती तीर ही ऐसे घोंपे है. बाक़ी तुम अब कीचड़ वाले फूल में तीर घोंपो या छुपाओ. तुम्हारी मर्ज़ी..'
 



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