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जानिए लालू यादव ने अपने एक बयान से शहाबुद्दीन की दलीलों की कैसे निकाली हवा?

लालू के इस खुलासे से जांच एजेंसियों को शहाबुद्दीन के खिलाफ अहम सबूत मिला है.

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जानिए लालू यादव ने अपने एक बयान से शहाबुद्दीन की दलीलों की कैसे निकाली हवा?

खास बातें

  1. पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में शहाबुद्दीन के खिलाफ चार्जशीट दायर
  2. लालू ने पिछले दिनों माना कि जेल में बंद शहाबुद्दीन से फोन पर बात होती थी
  3. लालू के इस खुलासे से जांच एजेंसियों को शहाबुद्दीन के खिलाफ अहम सबूत मिला
पटना: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के खिलाफ सीबीआई ने पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में मंगलवार को चार्जशीट दायर की. यह पहली बार है कि सीबीआई ने किसी मामले में शहाबुद्दीन के खिलाफ खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है. मंगलवार को मुजफ्फरपुर में सीबीआई कोर्ट में 302, 120 बी और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप पत्र दायर किया गया. सीबीआई की चार्जशीट शहाबुद्दीन के लिए करारा झटका है. एक और मामले में उनके खिलाफ ट्रायल आने वाले दिनों में शुरू होगा. साथ ही अन्य मामलों में भी अब उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों में अभियोजन पक्ष इस बात को सामने रखेगा कि जेल में रहने के बावजूद भी वह अपने विरोधियों या उन लोगों से, जिनसे उनकी नाराजगी होती थी, उनकी हत्या का वह किस तरह से आदेश देते थे.

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शहाबुद्दीन के समर्थक खासकर इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पिछले दिनों अपनी सीवान यात्रा के क्रम में एक जनसभा में यह स्वीकार किया कि जेल से उनके पास शहाबुद्दीन के फोन आते रहते थे. हालांकि उन्होंने कहा था कि ये फोन सीवान जिले में सांप्रदायिक तनाव के मद्देनजर आया था. लालू के इस खुलासे से जांच एजेंसियों को शहाबुद्दीन के खिलाफ अहम सबूत मिला है. शहाबुद्दीन के समर्थक मानते हैं कि लालू यादव के इस बयान को सीबीआई राजदेव रंजन हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करेगी. इसके अलावा चंदा बाबू भी अपने बेटे राजीव रोशन की हत्या के सिलसिले में चल रही अंतिम सुनवाई में लालू यादव के बयान को साक्ष्य के रूप में पेश करेंगे कि जेल से ही उनके बेटे की हत्या की साजिश रची गई थी.

फिलहाल शहाबुद्दीन दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं. सीवान और भागलपुर जेल से हटाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें तिहाड़ भेजा गया था, जहां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उनकी पेशी ट्रायल के दौरान होती है. उनके खिलाफ 67 मामले चल रहे थे, जिनमें से 23 मामलों में सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया. सात मामलों में निचली अदालत ने उन्हें सजा सुनाई, जिसमें से कुछ मामलों में पटना हाईकोर्ट ने उनकी सजा बरक़रार रखी.

शहाबुद्दीन ने नीतीश पर साधा था निशाना
पिछले साल जेल से रिहा होने के बाद शहाबुद्दीन ने भागलपुर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को परिस्थितयों का नेता बताया था. उसके बाद चंदा बाबू जिनके तीन बेटों की हत्या जमीन विवाद को लेकर कर दी गई थी, उन्होंने शहाबुद्दीन से अपनी जान को खतरा होने की बात कही. इस मामले को लेकर प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने भी शहाबुद्दीन के खिलाफ स्टैंड लिया. उस समय नीतीश के बारे में शहाबुद्दीन के बयान पर लालू यादव ने मौन साध लिया था. हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन का बयान आवेश में था, लेकिन शहाबुद्दीन के समर्थक मानते हैं कि एक बयान के कारण उनकी जेल वापसी तुरंत हो गई.

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1996 से लेकर 2005 तक ये माना जाता था कि भले पूरे बिहार में लालू यादव का राज चलता हो, लेकिन शहाबुद्दीन की मर्जी के बिना सीवान में पत्ता भी नहीं हिलता. लेकिन 2003 में उस समय के पुलिस महानिदेशक डीपी ओझा ने शहाबुद्दीन के खिलाफ सारे मामलों की जांच कर उनकी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से वारंट लिया था. ये एक खुला रहस्य है कि यह कार्रवाई ओझा ने लालू यादव के आदेश के बाद ही किया था. हालांकि लालू ने बाद में इस मुद्दे पर राजैनतिक नुकसान के मद्देनजर ओझा को पुलिस महानिदेशक के पद से हटा दिया. लेकिन कुछ महीनों को छोड़कर तब से शहाबुद्दीन या तो सीवान जेल या भागलपुर जेल और अब तिहाड़ जेल में ही बंद हैं. हालांकि राबड़ी देवी के 2005 तक सत्ता में रहने के दौरान शहाबुद्दीन को जेल में सारी सुविधाएं उपलब्ध थीं.

VIDEO: लालू के खुलासे से बढ़ सकती हैं शहाबुद्दीन की मुश्किलें नवंबर, 2015 में जब महागठबंधन की सरकार सत्ता में आई तब फिर से जेल में शहाबुद्दीन की तूती बोलने लगी. आरजेडी के मंत्री भी सीवान यात्रा के दौरान जेल में उनसे मुलाकात करने जरूर जाते थे. अखबारों में खबरें आने के बाद नीतीश ने इस बाबत सख्ती बरती और जेल के कई अधिकारियों पर इस मामले में कार्रवाई भी की गई थी.


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