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बोधगया विस्फोट मामले में इंडियन मुजाहिदीन के पांच आतंकियों को उम्रकैद की सजा

बिहार के पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने वर्ष 2013 में बोधगया में हुए सीरियल बम ब्‍लास्‍ट मामले में दोषी ठहराए गए सभी पांच आरोपियों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है

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बोधगया विस्फोट मामले में इंडियन मुजाहिदीन के पांच आतंकियों को उम्रकैद की सजा

फाइल फोटो

खास बातें

  1. सभी पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है
  2. बोधगया में सात जुलाई 2013 को हुए थे नौ सिलसिलेवार विस्फोट
  3. इस विस्‍फोट में बौद्ध भिक्षु और म्यांमार के तीर्थ यात्री घायल हुए थे
पटना : बिहार के पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने वर्ष 2013 में बोधगया में हुए सीरियल बम ब्‍लास्‍ट मामले में दोषी ठहराए गए सभी पांच आरोपियों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. गया जिले के बोधगया में सात जुलाई 2013 को हुए नौ सिलसिलेवार विस्फोटों में एक तिब्बती बौद्ध भिक्षु और म्यांमार के तीर्थ यात्री घायल हो गए थे.

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पटना स्थित एनआईए की अदालत के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार ने विस्फोटों के आरोपियों और इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी, इम्तियाज अंसारी, उमर सिद्दीकी, अजहरुद्दीन कुरैशी और मुजिबुल्लाह अंसारी को गत 25 मई को दोषी करार दिया था. अदालत ने शुक्रवार को दोषी करार दिए एक इंडियन मुजाहिदीन के सभी आरोपियों को आजीवान कारावास और 40-40 हजार रुपये की सजा सुनाई है. 

गौरतलब है कि विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी बोध गया में सात जुलाई 2013 की सुबह एक के बाद एक बम विस्फोट हुये थे जिसमें कुछ बौद्ध भिक्षुओं समेत बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए थे. इस मामले में छठे आरोपी तौफीक अहमद की उम्र 18 साल से कम थी और उसे पिछले साल एक किशोर अदालत द्वारा तीन साल सुधारगृह में रखने का आदेश दिया गया था. सभी छह आरोपी प्रतिबंधित संगठन सिमी के साथ जुड़े थे और इन सभी पर अक्तूबर , 2013 में पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में मुकदमा चल रहा है. 

ये बम धमाके उस वक्त किए गए थे जब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की एक चुनावी रैली चल रही थी. अदालत के आदेश की प्रशंसा करते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, 'आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों का कोई धर्म और मजहब नहीं होता. वे कड़ी से कड़ी सजा के पात्र हैं और हमें उम्मीद है कि अदालत भी सजा सुनाते वक्त इसे ध्यान में रखेगी.'    

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उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि पटना विस्फोट मामले के आरोपियों पर भी इसी तरह फैसला लिया जाएगा.' बचाव पक्ष के वकील सूर्य प्रकाश सिंह ने तर्क दिया था कि एनआईए इस मामले में सीसीटीवी फुटेज पेश करने में नाकाम रही है और मौके पर मौजूद एक सुरक्षा गार्ड किसी भी आरोपी की पहचान नहीं कर सका. इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए लोक अभियोजक ललन प्रसाद सिन्हा ने सभी आरोपियों के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दावा किया. उन्होंने मुकदमे की सुनवाई के दौरान करीब 90 प्रत्यक्षदर्शियों के दर्ज बयानों का हवाला दिया और कहा कि इससे यह पता चलता है कि ये विस्फोट म्यामां में बौद्ध बहुसंख्यकों द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों का बदला लेने के लिए किए गए थे। एनआईए अदालत के समक्ष इन आरोपियों का दोष साबित करने में सफल हुई. 

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सिन्हा ने संवाददाताओं को बताया कि बहुत से सबूतों , फॉरेसिंक और परिस्थितिक प्रमाणों को मुकदमे के दौरान अदालत के सामने रखा गया और गवाहों को देश के विभिन्न हिस्सों और यहां तक कि विदेश से भी पेश किया गया. वहीं बचाव पक्ष के वकील सूर्य प्रकाश सिंह ने कहा, 'हमारे अहम आपत्तियां उठाने के बावजूद अदालत ने अपने विवेक के आधार पर फैसला सुनाया है. हम इस आदेश के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय का रुख करेंगे.’    

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