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बिहार में राष्ट्रपति चुनाव के बहाने आपस में भिड़े नीतीश और लालू के प्रवक्ता

बिहार में सरकार के गठन से पूर्व से लेकर अब तक हमलावर राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं, रघुवंश प्रसाद सिंह और भाई वीरेंद्र के अलावा इस बार नीतीश कुमार के खिलाफ बयान देने वालों में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी शामिल हैं.

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बिहार में राष्ट्रपति चुनाव के बहाने आपस में भिड़े नीतीश और लालू के प्रवक्ता

लालू प्रसाद यादव के साथ नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. तेजस्वी के नजदीकी बता रहे हैं कि उनका बयान राहुल गांधी पर निशाना है
  2. जेडीयू ने तेजस्वी के ताजा बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है
  3. बिहार बीजेपी के नेता अब नीतीश के बचाव में कूद गए हैं
पटना: राष्ट्रपति चुनाव में बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद की जीत और विपक्षी उम्‍मीदवार मीरा कुमार की हार तय है. लेकिन इस चुनाव के बहाने सत्तारूढ़ महागठबंधन के दो सहयोगी - जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) - के नेताओं और प्रवक्ताओं के बीच वाकयुद्ध जारी है.

बिहार में सरकार के गठन से पूर्व से लेकर अब तक हमलावर राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं, रघुवंश प्रसाद सिंह और भाई वीरेंद्र के अलावा इस बार नीतीश कुमार के खिलाफ बयान देने वालों में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी शामिल हैं. तेजस्वी ने शुक्रवार को नीतीश कुमार के संवादाता सम्मलेन के दस मिनट के अंतराल पर ये कह कर सबको चौंका दिया था कि मैदान में कूदने से पहले जीत और हार तय नहीं होती. नीतीश कुमार ने कहा था कि 'बिहार की बेटी' को केवल हारने के लिए ही क्यों चुना गया है. तेजस्‍वी ने इसी के जवाब में ये बात कही थी. लेकिन रविवार को अपने दिल की बात के लेख में तेजस्वी ने एक कदम आगे जाते हुए यहां तक कह डाला कि 'कुछ लोग अपने अहंकार और गलत प्राथमिकता के कारण विपक्षी एकता का नुकसान कर रहे हैं. राजनीतिक दांव पेंच कर कुछ तात्कालिक तो हासिल किया जा सकता है लेकिन दीर्घकालिक राजनीति नहीं की जा सकती.' तेजस्वी के नजदीकी बता रहे हैं कि उनका बयान नीतीश केंद्रित नहीं बल्कि कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को निशाने पर रख कर लिखा गया है. लेकिन राहुल हों या नीतीश, तेजस्वी के बयान से महागठबंधन में शक और तनाव की दरारें और गहरी होंगी. हालांकि तेजस्वी ने दिल की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर रखा है लेकिन अपने दिल की बात से उन्होंने एकता के सरे दावों को हवा हवाई कर दिया है.  

वहीं जेडीयू ने तेजस्वी के तजा बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन उसके नेता आश्‍वस्‍त हैं कि तेजस्वी ने अपने दिल की बात से खुद की तरफ गोल कर दिया है. वो चाहे नीतीश के खिलाफ हो या राहुल के, कम से कम तेजस्वी यादव के प्रति इन दोनों नेतओं का विश्‍वास और कम होगा. नीतीश, तेजस्वी के शुक्रवार के बयान के अलावा उनके कामकाज से भी खुश नहीं चल रहे. राष्ट्रीय जनता दल   के नेता भी मानते हैं कि अपने पथ निर्माण विभाग का अधिकांश बजट जिस प्रकार से तेजस्वी ने दो ज़िले वैशाली और सारण में खर्च कर रहे हैं, वो नीतीश क्या, उनकी अपनी पार्टी के अधिकांश विधायकों के गले नहीं उतर रहा.

इससे पहले भी मई महीने में जिस दिन लालू यादव के घर पर दिल्ली में आयकर विभाग के छापे पड़े थे, उस समय भी लालू यादव का एक ट्वीट आया था कि बीजेपी को उनका नया सहयोगी मुबारक. हालांकि उस ट्वीट के बाद भी सफाई दी गयी कि इसका अर्थ आयकर  विभाग और अन्य जांच एजेंसियों से था लेकिन राजनीतिक गलियारे में इसे नीतीश के ऊपर दिया गया बयान माना गया था. इस बीच खबर है कि लालू यादव बयानबाजी से खफा हैं और उन्‍होंने अपनी पार्टी के प्रवक्तओं को मीडिया से दूर रहने के लिए कहा है. लेकिन सब जानते हैं कि जब खुद लालू यादव और तेजस्वी यादव खुल कर नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे हों, वैसे में उनकी पार्टी के प्रवक्ता बहती गंगा में हाथ क्यों न धोएं. अभी तक जनता दल यूनाइटेड के बिहार के अध्यक्ष वशिष्‍ठ नारायण सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार पर सीधे हमला कर राष्ट्रीय जनता दल के लोग इस बात का आकलन नहीं कर रहे कि इसका आखिर परिणाम क्या होगा.

इस बीच भारतीय जनता पार्टी के बिहार के नेता, वो चाहे सुशील मोदी हों या राज्य बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय या पूर्व अध्यक्ष मंगल पांडेय, सब अब नीतीश के बचाव में कूद गए हैं. माना जा रहा है कि ये नेता ऐसा पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के इशारे पर कर रहे हैं. लेकिन फ़िलहाल बिहार में राष्ट्रपति चुनाव के बहाने महागठबंधन सरकार खुद में उलझती जा रही है.


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