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नीतीश ने इशारों में समझाया, बीजेपी के साथ मीडिया; तो उनके साथ पूरा विपक्ष

बिहार विधानसभा में चमकी बुखार पर सोमवार को बहस हुई, यह बहस कई कारणों से याद रहेगी

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नीतीश ने इशारों में समझाया, बीजेपी के साथ मीडिया; तो उनके साथ पूरा विपक्ष

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो).

पटना:

चमकी बुखार पर बहस से नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में भाजपा को साफ कर दिया कि अगर आपके पास मीडिया है तो मेरे साथ भी बिहार का पूरा विपक्ष है.

बिहार विधानसभा में चमकी बुखार पर सोमवार को बहस हुआ. यह बहस कई कारणों से यादगार रहेगी. निश्चित रूप से बिहार विधानसभा के इतिहास में दशक के बाद विपक्ष का कार्यस्थगन प्रस्ताव मंज़ूर हुआ और पक्ष और विपक्ष निश्चित रूप से बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय चौधरी को इसका श्रेय देंगे. लेकिन जो बहस हुई उससे कई बातें साफ़ हुईं.

1. इस बहस का एक सबसे बड़ा संदेश यही था कि बिहार में भले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने मुंह से मीडिया के एक तबके के ख़िलाफ़ नहीं बोल रहे हों लेकिन बहस के दौरान विपक्ष के नेताओं के भाषण से साफ़ था कि मीडिया के इस वर्ग ने किसके इशारे पर नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ अमर्यादित और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया जाता है. इसके बारे में सब भलीभांति परिचित हैं और कम से कम इस मुद्दे पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर वे नीतीश कुमार के साथ दिखे.जो बिहार के संसदीय इतिहास में एक मुख्यमंत्री के लिए ऐसी विपक्ष को भावना आज तक नहीं दिखी थी.

2. भाजपा के नेताओं को भी बहस के तेवर से इस बात का अन्दाज़ हो गया कि विपक्ष में रहके जो सत्ता पक्ष के लिए पैमाना उन्होंने बनाया था अब जब वे सत्ता में बैठे हैं विपक्ष उन्हीं के पूर्व का याद दिलाकर इस्तीफ़ा की मांग कर रहा है.


3. इस बहस से साफ़ था कि फ़िलहाल नीतीश कुमार की स्थिति एक फूल दो माली वाली है कि बिहार में हर दल की पहली पसंद लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद अब वही है क्योंकि ये ग़लतफ़हमी अब हर दल के नेता और विधायक के मान से चली गई है कि नीतीश कुमार के बिना सत्ता में आया जा सकता है और नीतीश कुमार का साथ हो तो सत्ता से दूर कोई कर सकता है.

4. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो करीब चार हफ़्ते के बाद बच्चों की मौत पर सार्वजनिक रूप से बोल रहे थे उनकी बातों से साफ़ था कि इस बार बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण ग़रीबी, कुपोषण और तब गर्मी जैसी तात्कालिक कारण थे.

5. प्रशासनिक विफलता भी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का बयान हो या नीतीश कुमार का, उनकी बातों से साफ़ था कि जो जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए था वो चुनाव के चक्कर में इस बार शिथिल पड़ गया था.

6. सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा था ख़ुद स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा पेश किया गया जिसके अनुसार इस बीमारी से 2011 से अब तक 1663 लोगों की मौत हुई है.

7. हालांकि बहस के दौरान किसी विधायक ने यह सवाल नहीं उठाया कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी अस्पताल और आईसीयू का दौरा कर रहे थे तब क्या उस अस्पताल में आख़िर एक भी मास्क नहीं था. और जो चप्पल उन्हें दी गई थी वह भी उस सुबह पहली बार वीवीआईपी दौरे के कारण लाई गई थी.

8. हालांकि इस बहस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने हर दिन का ब्यौरा दिया लेकिन एक बात पर वो मौन रहे कि जब हर दिन बीमार बच्चों को संख्या बाढ़ रही थी तब डॉक्टरों और नर्सों की संख्या बढ़ाने का फ़ैसला भी नीतीश कुमार के दौरे तक क्यों रुका रहा.

9. ये बहस इस बात के लिए भी याद की जाएगी कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर जब बहस चल रही थी उस समय विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अपने घर पर बैठे रहे लेकिन विधानसभा आने की ज़रूरत नहीं समझी.

10. लेकिन पूरी बहस के बावजूद ये बात तय नहीं हुई कि बच्चों की मौत के लिए ज़िम्मेदार कौन. सबसे रोचक रहा उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी का ट्वीट जिसमें उन्होंने साफ़ किया कि चूंकि लालू-रबड़ी ने अपने शासन काल में कभी भी नैतिक ज़िम्मेदारी नहीं ली इसलिए मंगल पांडेय भी इस्तीफ़ा नहीं देंगे.

VIDEO : नीतीश ने तोड़ी चुप्पी

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