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नीतीश कुमार की कांग्रेस को दो टूक- मैं किसी का पिछलग्गू नहीं, खुशामद करना फितरत में नहीं

नीतीश का कांग्रेस पर आरोप- आजादी के बाद सबसे पहले गांधी और बाद में नेहरू के सिद्धांतों को तिलांजलि दी

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नीतीश कुमार की कांग्रेस को दो टूक-  मैं किसी का पिछलग्गू नहीं, खुशामद करना फितरत में नहीं

नीतीश कुमार ने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि वह अपने सिद्धांत बदलती रहती है.

खास बातें

  1. कहा- कोई गलतफहमी में न रहे, वे सहयोगी हैं और सहयोगी की तरह रहेंगे
  2. कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद के बयान से नाराज हैं नीतीश
  3. नीतीश ने कहा- विपक्ष में एकता के प्रयास सफल नहीं होने दिए कांग्रेस ने
पटना: जनता दल यूनाईटेड के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस से साफ शब्दों में कह दिया है कि वे किसी के पिछलग्गू नहीं हैं. नीतीश कुमार ने रविवार को पटना में राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि कोई गलतफहमी में न रहे कि वे किसी के पिछलग्गू हैं. वे सहयोगी हैं और सहयोगी की तरह रहेंगे.

नीतीश कुमार ने कांग्रेस के नेताओं से साफ शब्दों में कहा कि खुशामद करना उनकी फितरत में शामिल नहीं है.   

नीतीश इन दिनों कांग्रेस से खफा चल रहे हैं. खासकर नीतीश की नाराजगी कांग्रेस के महासचिव गुलाम नबी आजाद के उस बयान को लेकर है कि नीतीश एक विचारधारा नहीं, बल्कि कई विचार धारा के नेता हैं. आजाद का यह बयान राष्ट्रपति चुनाव को लेकर दिया गया था.

राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर नीतीश ने साफ किया कि उन्होंने रामनाथ कोविन्द, जो कि बिहार के राज्यपाल थे, को  समर्थन दिया है न कि भारतीय जनता पार्टी को. इस मुद्दे पर नीतीश ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बयान पर कहा कि भिड़ना चाहिए किससे और भिड़ गए किससे!  

सिद्धांतों से समझौते पर नीतीश ने अपनी पार्टी के नेताओं को विस्तार से बताया कि वे सिद्धांतों से समझौता नहीं करते.  कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए नीतीश ने कहा कि सिद्धांत पर आप बदलते रहते हैं. स्वर्गीय राममनोहर लोहिया कहा करते थे कि कांग्रेस सरकारी गांधीवादी हैं.

राष्ट्रपति चुनाव की चर्चा करते हुए नीतीश ने कहा कि दिल्ली में सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई बैठक के पहले गुलाम नबी आजाद के पटना में बयान कि कोविंद का विरोध किया जाएगा, के बाद उस बैठक में जाने का कोई औचित्य नहीं रह गया था. नीतीश ने कांग्रेस पार्टी पर यह भी आरोप लगाया कि आजादी के बाद सबसे पहले उन्होंने गांधी और बाद में नेहरू के सिद्धांतों को तिलांजलि दी.     

बिहार में महागठबंधन के भविष्य पर उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से पार्टी के काम पर  ध्यान देने के लिए कहा. नीतीश ने कहा कि गठबंधन कैसे चल रहा है, जो होना है वह होगा और हम सही समय पर निर्णय लेते हैं. लेकिन हम किसी की परवाह नहीं करते हैं. लेकिन नीतीश ने अपने सहयोगी द्वारा आयोजित रैली से संबंधित अटकलों पर यह कहकर विराम लगा दिया कि निमंत्रण आने पर वे जरूर जाएंगे.

नीतीश के तेवर से स्पष्ट है कि फिलहाल सरकार चलाने की मजबूरी की आड़ में वे अपने किसी सहयोगी के सामने किसी मुद्दे पर झुकने के लिए तैयार नहीं हैं. नीतीश ने विपक्ष की एकता की चर्चा करते हुए कहा कि पहले असम चुनाव के पूर्व और दूसरी बार उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले उन्होंने पहल की, लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने नहीं होने दिया और दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी.  
     
नीतीश के कड़े स्टैंड से निश्चित रूप से आने वाले दिनों में उनके दो सहयोगियों कांग्रेस और राजद के बीच नजदीकी बढ़ेगी. जानकर मानते हैं कि कांग्रेस के बार-बार यह जताने से कि उन्होंने लालू यादव के दबाव के बावजूद नीतीश कुमार को बिहार में महागठबंधन का नेता बनाया, नीतीश न केवल दुखी हैं बल्कि इस बात से चिढ़े भी हैं कि जब भी वे बीजेपी को मात देने के लिए कोई ठोस रणनीति की पहल करते हैं, कांग्रेस के नेता ही उसको विफल कर देते हैं. वे सार्वजनिक रूप से और मीडिया में चुपके से यह भी प्लांट करने से नहीं चूकते कि नीतीश बीजेपी से संबंध मधुर बना रहे हैं.


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