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जानें नीतीश कुमार विश्वविद्यालयों की दुर्दशा के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार क्यों नहीं मानते

नीतीश के मुताबिक- विश्वविद्यालय का सत्र नियमित रहे इसलिए जब उनकी सरकार आई तो एकैडमिक कैलेंडर बनाकर इसमें सुधार लाया गया.

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जानें नीतीश कुमार विश्वविद्यालयों की दुर्दशा के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार क्यों नहीं मानते

विश्वविद्यालयों की हालत पर नीतीश कुमार

खास बातें

  1. सरकार का विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण नहीं
  2. राज्यपाल चांसलर के रूप में सर्वेसर्वा
  3. हमारी जिम्मेदारी केवल धन मुहैया कराना
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार टीवी पर अपने राज्य के विश्वविद्यालयों से जुड़ी खबरें तो देखते हैं, लेकिन उसके लिए अपनी सरकार को जिम्मेदार नहीं मानते. नीतीश का कहना है कि विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्थान है और सरकार का उनके ऊपर नियंत्रण नहीं है. हालांकि नीतीश ने दावा किया कि राज्य के विश्वविद्यालय में शिक्षकों का जो अभाव है उसके लिए राज्य लोकसेवा आयोग की प्रक्रिया जारी है. उनका कहना है कि सरकार विश्वविद्यालय को 4 हजार करोड़ देती है, लेकिन राज्य के राज्यपाल चांसलर के रूप में सर्वेसर्वा होते हैं. हमारी जिम्मेदारी केवल धन उपलब्ध कराना है.

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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का सत्र नियमित रहे इसलिए जब उनकी सरकार आई तो एकैडमिक कैलेंडर बनाकर इसमें सुधार लाया गया, लेकिन नीतीश का मानना है कि अगर नियमों में संशोधन कर उच्च शिक्षा को भी पूरे तरीके से राज्य सरकार के अधीन कर दिया जाए तो निश्चित रूप से गुणात्मक सुधार किया जाएगा. 

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नीतीश ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी आलोचना पर कहा कि लोगों को भूल नहीं जाना चाहिए जब उनकी सरकार आई तब करीब साढ़ें बारह प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर थे, अब घटकर एक प्रतिशत हो गई है. नीतीश ने इस बात पर कुछ नहीं कहा कि राज्य में शिक्षकों का स्तर भी अच्छा होना चाहिए. आखिर उसमें सुधार करने के लिए क्या रोड मैप है, लेकिन इसे लेकर उनका कहना है कि जो निर्णय उन्हें या उनकी मंत्रिपरिषद को नहीं लेना है तो उस मामले में खामी का ठीकरा उनके ऊपर नहीं फोड़ना चाहिए.
वहीं राजद के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का कहना है कि बिहार में फिलहाल 13564 शिक्षकों के पदों में से 7485 पद रिक्त हैं. जहां राज्य में 60 के दशक में दो लाख छात्रों के लिए 15000 शिक्षक थे अब मात्र 5000 शिक्षकों के ऊपर दस लाख छात्रों की जिम्मेवारी है. पटना विश्वविद्यालय में जहां शताब्दी दिवस समारोह मनाया जा रहा है अभी 276 शिक्षकों के ऊपर 18 हजार छात्रों की जिम्मेदारी है.


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