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आखिर क्यों बिहार के CM नीतीश कुमार ने भरी मीटिंग में लगाई जिला अधिकारियों की क्लास?

नीतीश कुमार मोबाइल फ़ोन नहीं रखते. कम से कम अपने साथ तो लेकर नहीं चलते. इसकी तस्दीक बिहार सरकार की उस हर मीटिंग में हो जाती है जिसकी अध्यक्षता खुद नीतीश कुमार करते हैं.

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आखिर क्यों बिहार के CM नीतीश कुमार ने भरी मीटिंग में लगाई जिला अधिकारियों की क्लास?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी.

पटना:

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मोबाइल फ़ोन नहीं रखते. कम से कम अपने साथ तो लेकर नहीं चलते. इसकी तस्दीक बिहार सरकार की उस हर मीटिंग में हो जाती है जिसकी अध्यक्षता खुद नीतीश कुमार करते हैं. शनिवार को तो एक बैठक में नीतीश कुमार ने कई ज़िला अधिकारियों की क्लास लगा दी. दरअसल नीतीश कुमार ने विधान सभासत्र ख़त्म होने के बाद सूखे और बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई थी, लेकिन सात घंटे चली इस बैठक में कई ऐसे ज़िला अधिकारी थे जो अपने साथ बैठे अधिकारियों से बातचीत करने लगे या कुछ ज़िला अधिकारी मोबाइल पर बिजी हो गए. शायद ज़िला अधिकारियों को इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि नीतीश कुमार की नज़र उनके सामने लगे बड़े मॉनिटर पर टिकी हुई है और वे सबकुछ नोटिस कर रहे हैं. 

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इसके बाद उन्होंने कुछ ज़िला अधिकारियों को बातचीत करने पर टोका तो कुछ को मोबाइल पर व्यस्त रहने पर. इसके बाद उन्होंने कई ज़िला अधिकारियों को बग़ल के जिले की समीक्षा को भी ध्यान से सुनने की सलाह दी. नीतीश कुमार के इस तरह से चीजों को बारीकी से नोट करने पर सभी हैरान थे. हालांकि नीतीश के साथ काम कर चुके विरोधी भी मानते हैं कि जब वो समीक्षा कर रहे हों तब उनकी जैसी पैनी निगाहें, ख़ासकर चीज़ों को बारीकी से सुनने और उसके तह में जाने का धैर्य बहुत कम नेताओं के पास है. वह समीक्षा बैठक में औपचारिकता से बचते हैं.  

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इसका ताज़ा उदाहरण है चमकी बुखार. भले ही वहां समीक्षा कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय लौट आये, लेकिन नीतीश कुमार जब मुज़फ़्फ़रपुर के श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल गये तब उन्होंने बीमार बच्चों की संख्या देखते हुए अलग से डॉक्टर और नर्सेज़ की टीम भेजने का फ़ैसला किया. हालांकि इस बात की भी चर्चा है कि अगर वे कुछ दिन पहले अस्पताल का दौरा करते तो कुछ और बच्चों की जान बच जाती.  



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