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गठबंधन में रहकर भी नीतीश कुमार छुड़वा रहे हैं लालू यादव के पसीने....

विपक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में दो माह पहले से फील्डिंग कर रहा था लेकिन ऐन मौके पर बिखरने लगा है. नीतीश के इस कदम को बिहार और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में जेडीयू को बीजेपी को ओर झुकाव के रूप में देखा जा रहा है.

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गठबंधन में रहकर भी नीतीश कुमार छुड़वा रहे हैं लालू यादव के पसीने....

राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर नीतीश कुमार और लालू यादव ने चुनी अलग-अलग राह....(फाइल फोटो)

खास बातें

  1. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी पार्टियों की एकता में सेंध लगाई
  2. नीतीश कुमार का यह कदम का बीजेपी को ओर झुकाव माना जा रहा है
  3. शरद यादव ने कहा कि हमारा महगठबंधन प्रभावित नहीं होगा
पटना: राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी समर्थित उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन करके बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी पार्टियों की एकता को तोड़ दिया है. विपक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में दो माह पहले से फील्डिंग कर रहा था लेकिन ऐन मौके पर बिखरने गया. नीतीश के इस कदम को बिहार और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में जेडीयू का बीजेपी के प्रति झुकाव के रूप में देखा जा रहा है. नीतीश कुमार खुद भी दलित वोटों के सहारे पिछले तीन पंचवर्षीय से सत्ता पर काबिज हैं. 11 साल पहले उन्होंने दलितों के लिए नई श्रेणी जोड़ी थी. दलितों के लिए कई योजनाएं बिहार में चला रहे हैं. ऐसे में वोट बैंक पर नजर रखकर ही उन्होंने अपने गठबंधन साथी से अलग फैसला किया है.

पार्टी के प्रमुख नेता शरद यादव ने कहा, "हमारा महगठबंधन प्रभावित नहीं होगा." उन्होंने महागठबंधन के मायने बबाते हुए कहा कि यह ऐसा गुट है जो प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ है. जहां तक राष्ट्रपति चुनाव की बात है तो यह बिल्कुल ही अलग मामला है. हालांकि जब राष्ट्रपति चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई थी तो नीतीश ने ही सोनिया गांधी से विपक्ष का उम्मीदवार उतारने की पहल की थी. इस दौरान लालू भी उनके साथ थे. नीतीश ने महागठबंधन को झटका देते हुए नवंबर में नोटबंदी को बेहतर कदम बताकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी. इससे राजद और कांग्रेस ने अच्छी खासी नाराजगी जताई थी. इसके बाद मार्च में उत्तरप्रदेश में बीजेपी की प्रचंड जीत पर नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना की थी.

इसी सप्ताह लालू यादव परिवार के छह सदस्यों पर आयकर विभाग ने बेनामी संपत्त्ति के मामले में कार्रवाई की है. दिल्ली से लेकर पटना तक की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है. लालू यादव को चार साल पहले ही चारा घोटाले में सजा हो चुकी है. एक बार फिर उनके परिवार पर नए आरोप और मुकदमे सामने आए हैं.

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कर अधिकारियों ने बुधवार को लालू यादव की बेटी से दिल्ली में छह घंटे तक पूछताछ की. लालू इस बात से चिंतित है कि नीतीश कुमार उनका बिल्कुल भी बचाव नहीं कर रहे हैं. वहीं, बिहार कांग्रेस नेताओं का मानना है कि नीतीश धीरे-धीरे लालू से किनारा काट रहे हैं. हालांकि आधिकारिक तौर पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. लालू गुरुवार को आयोजित होने वाली विपक्ष की बैठक में शामिल होंगे. उधर, नीतीश को बिहार में सत्ता में बने रहने के लिए 122 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी. ऐसे में अगर वह लालू की पार्टी राजद और कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी का थाम लेते हैं तो उनकी कुर्सी सुरक्षित रहेगी.

गौरतलब है कि 2013 में नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बीजेपी से गठबंधन तोड़ लिया था. हालांकि, मोदी लहर में उन्हें 40 सदस्यीय बिहार लोकसभा में केवल दो सीटे ही नसीब हो पाई थीं. ऐसे में नीतीश ने अपने धुर राजनीतिक विरोधी लालू से नात जोड़ लिया था.  


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