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प्राचीन घरती पर धम्म और धर्म की युगल परंपरा की घर वापसी हुई : राष्ट्रपति

राष्ट्रपति ने राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन हॉल में अंतरराष्ट्रीय धम्म सम्मेलन का उद्घाटन किया, सीएम नीतीश कुमार भी रहे मौजूद

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प्राचीन घरती पर धम्म और धर्म की युगल परंपरा की घर वापसी हुई : राष्ट्रपति

राजगीर में धम्म सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, सीएम नीतीश कुमार व अन्य अतिथि.

पटना: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन हॉल में अंतरराष्ट्रीय धम्म महासम्मेलन का उद्घाटन किया.  इसमें राष्ट्रपति सहित 11 बौद्ध देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए.  इस मौके पर राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री ने धम्म के संदेश से लोगों को अवगत कराया.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय धर्म—धम्म कॉन्फ्रेंस है लेकिन, पहली बार नालंदा विश्वविद्यालय और बिहार सरकार द्वारा इसकी मेजबानी की जा रही है. सच कहें तो विश्वास, विवेक और ज्ञान की इस प्राचीन घरती पर धम्म और धर्म की युगल परंपरा की घर वापसी हुई है. यह महात्मा बुद्ध की धरती है. महात्मा बुद्ध के जमाने में, आधुनिक प्रांत और प्रांतीय सीमाओं के पूर्व यह पूरा इलाका मगध के नाम से जाना जाता था.  उस दौर में संस्कृत और पाली संवाद की मुख्य भाषाएं थीं.  धर्म संस्कृत का शब्द है और धम्म पाली का. दोनों का अर्थ एक है.  दोनों की जड़ें एक हैं.  मगध क्षेत्र से गुजरते हुए महात्मा बुद्ध एवं उनके अनुयायियों ने जहां विश्राम किया वह मठों में तब्दील हुआ.  इन्हें विहार कहा जाता था. और इस विहार शब्द से ही प्रदेश का नाम बिहार हुआ.

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इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि धम्म का संदेश स्पष्ट है जो सत्य पर आधारित है और सब की इच्छा है कि समाज में शांति, प्रेम, सदभाव स्थापित हो. साथ ही राग-द्वेष, माया-मोह का भाव खत्म हो, धम्म का यही उद्देश्य है. नालंदा अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान का केंद्र बने, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए.  उन्होंने कहा कि काफी मशक्कत के बाद प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को विश्व धरोहर की मान्यता मिली है. राजगीर में भी बहुत कुछ है. राजगीर को भी विश्व धरोहर में शामिल करने का प्रयास हो. उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय को एक कनंफ्लिक्ट रिजोल्यूशन सेंटर के रूप में स्थापित होना चाहिए. इसके लिए जमीन भी उपलब्ध करा दी गई है. यहां कई देश के राष्ट्रपति आ सकते हैं इसके लिए स्टेट गेस्ट हॉउस की व्यवस्था की जा रही है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सभी धर्मों का केन्द्र रहा है. राष्ट्रपति बनने के बाद दूसरी बार महामहिम राष्ट्रपति जी का आगमन बिहार में हुआ है. मैं इसके लिए विशेष तौर पर स्वागत करता हूं और चाहता हूं कि साल में कम से कम दो बार इस बिहार के ऐतिहासिक भूमि पर राष्ट्रपति जी का आगमन हो. कार्यक्रम को श्रीलंका के विदेश मंत्री  तिलक मारापाना एवं भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीमती प्रीति शरण ने भी संबोधित किया.


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