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जिस तेजप्रताप को पीएम मोदी ने 'किशन कन्हैया' कहा वह उनकी खाल उधेड़ने की धमकी क्यों दे रहे हैं?

बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राजद विधायक तेजप्रताप यादव राज्य के मीडियाकर्मियों के लिए एक नए सिरदर्द बनकर उभर रहे हैं.

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जिस तेजप्रताप को पीएम मोदी ने 'किशन कन्हैया' कहा वह उनकी खाल उधेड़ने की धमकी क्यों दे रहे हैं?

तेजप्रताप यादव आए दिन कोई न कोई आपत्तिजनक बयान देते रहते हैं

पटना: बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राजद विधायक तेजप्रताप यादव राज्य के मीडियाकर्मियों के लिए एक नए सिरदर्द बनकर उभर रहे हैं. हालांकि उनकी असल पहचान है कि वह राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे हैं, लेकिन उनके अनाप-शनाप बयानों के कारण मीडिया को उनकी बाइट और भाषणों पर गौर से नजर रखने की एक नई जिम्मेदारी आ गई है. बहुत कम लोग जानते हैं कि तेजप्रताप यादव को इस साल गुरु पर्व के समापन समारोह में भाग लेने के बाद भोजन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देखा था, तो उन्हें किशन कन्हैया कहकर उनका हालचाल पूछा था. इसी समारोह में पीएम मोदी ने शराबबंदी के फैसले को लेकर नीतीश कुमार की तारीफ भी की थी और नीतीश के सामने लालू से कहा था कि आपका हालचाल प्रेम गुप्ता से मिलता रहता है. मतलब नीतीश को बताया कि राजद सांसद प्रेम गुप्ता उनसे मुलाकात करते रहते हैं.

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लेकिन यहां असल सवाल है कि तेजप्रताप यादव के इतने बिगड़े बोल क्यों हैं? उसका एक सीधा जवाब यह है कि उनकी पढ़ाई-लिखाई पूरी नहीं हुई, वो ग्रैजुएट भी नहीं हैं. यहां तक कि लालू यादव नहीं चाहते थे कि तेजप्रताप राजनीति में आएं, इसलिए उनके नाम पर बाइक का एक शोरूम राज्य के औरंगाबाद में कई वर्ष पूर्व खुलवाया था. लेकिन तेजप्रताप को उसे चलाने में कभी कोई रुचि नहीं थी. अपनी मां राबड़ी देवी के प्रेम और जिद के कारण तेजप्रताप का राजनीति में आगमन हुआ, लेकिन शुरुआत के दिनों से तेजप्रताप के कटु वाक्यों के कारण कई नेताओं ने राजद और लालू को बाई-बाई करना बेहतर समझा. ऐसे नेताओं में वर्तमान में केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव भी शामिल हैं, जिनका तेजप्रताप के संबंध में संस्मरण बहुत कटु रहा है.

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तेजप्रताप ने विधानसभा चुनाव में नामांकन भरा, लेकिन उनका असल चुनाव लालू और नीतीश कुमार ने लड़ा. शायद इन दोनों नेताओं का उनके विधानसभा क्षेत्र महुआ में कितनी सभाएं हुईं, उसकी गिनती उन्हें भी नहीं मालूम. चुनाव जीतने के बाद तेजप्रताप अपने पिता की कृपा से स्वास्थ्य मंत्री बन तो गए, लेकिन अपनी हरकत से विभाग को बीमार कर दिया. वह एक ऐसे स्वास्थ्य मंत्री थे जिनकी तबियत उस दिन खास तौर पर बिगड़ जाती थी, जिस दिन कोई कार्यक्रम होता था. राज्य के पर्यावरण विभाग में तो अपने मॉल की मिट्टी के चक्कर में उन्होंने सब कुछ ऐसा बिगाड़ दिया कि आज तक उसका नतीजा भुगत रहे हैं.

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सवाल यह भी है कि तेजप्रताप अपने भाषणों या बयानों में इतना अनाप-शनाप क्यों बोलते है. इसके पीछे वजह है कि लालू यादव समेत उनके घर या उनकी पार्टी में किसी की हिम्मत नहीं कि उन्हें ये नसीहत दे कि आप गलत कर रहे हैं. चाहे सुशील मोदी को धमकी देने का मामला हो या पीएम नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहने का. राजद के लोग भी मानते हैं कि तेजप्रताप अपने ऐसे बयानों से खुद के लिए एक लंपट नेता की छवि बनाते जा रहे हैं. दिक्कत यह भी है कि उन्हें समझाना 'बिल्ली के गले' में घंटी बांधने के समान हैं.

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लालू यादव जानते हैं कि ऐसे बयान देने के बाद डैमेज कंट्रोल करने में जितनी ऊर्जा व्यर्थ जाती है, उससे बचा जा सकता है. लेकिन लालू अपने तेजस्वी प्रेम में इसी चक्कर में लगे रहते है कि तेजप्रताप खुश रहे और गुस्से में कोई हिंसक प्रतिक्रिया न दे दे. राजद के विधायक भी मानते हैं कि तेजप्रताप पार्टी के लिए सिरदर्द और मजाक का पात्र बन गए हैं. मजबूरी है कि उनके अभद्र बयानों पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की किसी के पास हिम्मत नहीं है.

VIDEO : तेजप्रताप के बिगड़े बोल
ऐसे में इस परिवार के राजनीतिक विरोधी खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगर निश्चिंत होकर मुस्कुराते दिखें, तो उसके लिए कोई और नहीं, तेजप्रताप यादव जिम्मेदार हैं.


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